बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के चेयरमैन तारिक रहमान ने आज देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले ली है. राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने जातीय संसद भवन के साउथ प्लाजा में शाम करीब 4:15 बजे उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. इससे पहले दिन में बीएनपी संसदीय दल की बैठक में तारिक रहमान को सर्वसम्मति से संसदीय दल का नेता चुना गया था. इस ऐतिहासिक मौके पर बीएनपी गठबंधन के 212 सांसदों और जमात समर्थित गठबंधन के 76 सांसदों सहित सात निर्दलीय सांसदों ने भी शपथ ली है.
25 मंत्रियों ने ली शपथ
प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ उनके मंत्रिमंडल के 25 मंत्रियों और 24 राज्य मंत्रियों ने भी आज शपथ ली है. मंत्री पद के लिए 25 उम्मीदवार हैं: मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर, अमीर खोशरू महमूद चौधरी, सलाहुद्दीन अहमद, इकबाल हसन महमूद, मेजर (रिटायर्ड) हाफिज उद्दीन अहमद बीर बिक्रम, अबू जफर एमडी जाहिद हुसैन, डॉ खलीलुर रहमान (टेक्नोक्रेट), अब्दुल अवल मिंटू, काजी शाह मोफज्जल हुसैन कैकोबाद, मिजानुर रहमान मीनू, निताई रॉय चौधरी, खंडेकर अब्दुल मुक्तदिर, अरिफुल हक चौधरी, जहीर उद्दीन स्वपन, मोहम्मद अमीन उर राशिद (टेक्नोक्रेट), अफरोजा खानम रीता, शाहिद उद्दीन चौधरी एनी, असदुल हबीब दुलु, एमडी असदुज्जमान, जकारिया ताहिर, दीपेन दीवान, ANM एहसानुल हक मिलन, सरदार एमडी सखावत हुसैन, फकीर महबूब अनम और शेख रबीउल आलम.
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राज्य मंत्री के लिए 24 उम्मीदवार हैं: एम रशीदुज्जमां मिल्लत, अनिंद्य इस्लाम अमित, एमडी शरीफुल आलम, शमा ओबैद इस्लाम, सुल्तान सलाहुद्दीन टुकू, बैरिस्टर कैसर कमाल, फरहाद हुसैन आजाद, एमडी अमीनुल हक (टेक्नोक्रेट), मीर मोहम्मद हेलाल उद्दीन, हबीबुर रशीद, एमडी राजिब अहसन, एमडी अब्दुल बारी, मीर शाहे आलम, जोनायद अब्दुर रहीम साकी, जिन्हें जोनायद साकी के नाम से जाना जाता है, इशराक हुसैन, फरज़ाना शर्मिन, शेख फरीदुल इस्लाम, नूरुल हक नूर, यासर खान चौधरी, एम इकबाल हुसैन, एमए मुहिथ, अहमद सोहेल मंजूर, बॉबी हज्जाज और अली नवाज महमूद खैयाम.
बांग्लादेश में लोकतंत्र की वापसी?
संसद के शपथ कक्ष में भारी सुरक्षा के बीच आयोजित इस समारोह को बांग्लादेश में लोकतंत्र की वापसी के तौर पर देखा जा रहा है. तारिक रहमान के नेतृत्व वाली इस सरकार के सामने देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और कानून व्यवस्था सुधारने की बड़ी चुनौती है. आम जनता को नई सरकार से काफी उम्मीदें हैं क्योंकि यह चुनाव एक लंबे राजनीतिक संघर्ष के बाद संपन्न हुए हैं. अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें भी अब ढाका की ओर टिकी हैं कि नई सरकार पड़ोसी देशों और वैश्विक शक्तियों के साथ कैसे संबंध आगे बढ़ाती है.