United Kingdom Prime Minister Rishi Sunak Rating Survey: यूनाइटेड किंगडम (UK) के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की लोकप्रियता में खासी गिरावट आई है। यह जानकारी YouGov की ओर से किए गए एक सर्वे में सामने आई है। ऐसा उनकी सरकार की ओर से लाई गई रवांडा पॉलिसी के चलते हुआ है। सर्वे के अनुसार 70 प्रतिशत लोगों का रुख प्रधानमंत्री के खिलाफ है और 21 प्रतिशत उनके समर्थन में हैं। सुनक को पसंद करने के मामले में अब उनकी रेटिंग माइनस 49 हो गई है जो नवंबर के मुकाबले 10 अंक कम है। सुनक पिछले साल अक्टूबर में प्रधानमंत्री बने थे और यह उनका अब तक का सबसे कम स्कोर है। सर्वे के मुताबिक साल 2019 में सुनक की टोरी पार्टी को वोट करने वालों में से 56 प्रतिशत प्रधानमंत्री को लेकर नकारात्मक विचार रखते हैं। 40 प्रतिशत लोगों ने उन्हें लेकर सकारात्मक रुख दिखाया।

पार्टी की छवि सुधारने की कोशिश में जुटे सुनक

बता दें कि ऋषि सुनक अपनी कंजर्वेटिव पार्टी की छवि सुधारने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सुनक की पार्टी एक अंदरूनी विवाद का सामना भी कर रही है जिसने शरण चाहने वाले लोगों को रवांडा भेजने की उनकी मुख्य पॉलिसी पर भी खतरा पैदा कर दिया है।

'टोरी पार्टी अवैध इमिग्रेशन के खिलाफ एकजुट'

टोरी सांसद फिलिप डेविस का कहना है कि अवैध इमिग्रेशन को रोकने के मामले में पार्टी पूरी तरह से एकजुट है। हमारा मानना है कि ऐसे लोगों को रवांडा भेजना एक सही समाधान है। उन्होंने कहा कि यह बिल प्रभावी है या इसे बेहतर किया जा सकता है इस पर सबके अलग मत हो सकते हैं लेकिन अवैध इमिग्रेशन पर रोक लगाने के लिए पार्लियामेंट में हम पूरी तरह से एक हैं। इसके लिए जो जरूरी होगा वह हम करेंगे।

जानिए क्या है ऋषि सुनक की रवांडा पॉलिसी

देश में अवैध इमिग्रेशन को रोकने के लिए ऋषि सुनक यह पॉलिसी लेकर आए हैं। इसका उद्देश्य अवैध प्रवासियों को पूर्वी अफ्रीका के देश रवांडा भेजने की योजना बनाई गई है। यूके में अगले साल आम चुनाव होने हैं और उससे पहले इसे सुनक की टॉप प्राथमिकताओं में से एक माना जा रहा है। वहीं, देश की विपक्षी लेबर पार्टी का कहना है कि अवैध इमिग्रेशन की समस्या का यह व्यावहारिक हल नहीं है। ये भी पढ़ें: हमास के साथ लड़ाई में अमेरिका-इजरायल के बीच आई खटास ये भी पढ़ें: गाजा में सीजफायर पर UN में प्रस्ताव का भारत ने किया समर्थन ये भी पढ़ें: 12 साल की भारतीय एक्टिविस्ट ने UN सम्मेलन में जताया विरोध