पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नेपाल की तरह Gen-Z विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है. यहां एक महीने में दूसरी बार बड़ी अशांति देखने को मिल रही है. इस बार छात्र और जेनरेशन-ज़ेड के नेतृत्व में प्रदर्शन हो रहा है. यह प्रदर्शन यूनिवर्सिटी की फीस और परीक्षा परिणामों को लेकर कैंपस में शुरू हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे यह प्रदर्शन बड़ा हो गया है और अब यह शहबाज शरीफ की सरकार और पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान के खिलाफ एक बड़े विद्रोह में बदल गया है.
पहले फीस को लेकर शुरू हुआ प्रदर्शन और फिर...
रिपोर्ट्स के मुताबिक, विरोध प्रदर्शनों की ताज़ा लहर इस महीने की शुरुआत में मुजफ्फराबाद में स्थित आजाद जम्मू और कश्मीर विश्वविद्यालय (UAJK) में शुरू हुई. सबसे पहले यहां छात्रों ने फीस में अत्यधिक वृद्धि और परीक्षा परिणामों में गड़बड़ियों के खिलाफ रैली निकाली थी. बताया जा रहा है कि छह महीने की देरी से जारी इंटरमीडिएट प्रथम वर्ष के परिणामों से बड़ी संख्या में छात्र नाराज़ हुए. कई छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें बेवजह कम अंक दिए गए, जबकि अन्य को उन विषयों में पास कर दिया गया जिनकी उन्होंने कभी परीक्षा ही नहीं दी थी.
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हालांकि इसकी जांच के लिए एक टीम गठित कर दी गई, लेकिन छात्र तब और आक्रोशित हो गए जब सरकार की तरफ से कॉपी की दोबारा जांच के लिए 1500 रुपये की फीस लगा दी गई. छात्रों की पहले नाराज़गी सिर्फ बदहाल शिक्षा व्यवस्था को लेकर थी, लेकिन धीरे-धीरे इसमें जर्जर इंफ्रास्ट्रक्चर, खराब स्वास्थ्य सेवाएं और परिवहन की कमी जैसे मुद्दे भी शामिल हो गए.
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प्रदर्शन में शामिल हो गए ये भी मुद्दे
खबरों के अनुसार, शिक्षा पर आधारित इस आंदोलन में जल्द ही भ्रष्टाचार, बेरोजगारी आदि मुद्दे भी शामिल हो गए. ये वे मुद्दे हैं जो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लंबे समय से चली आ रही शिकायतें हैं. सरकारों की तरफ से इन मुद्दों को लगातार नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है.
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माना जा रहा है कि प्रदर्शन उस वक्त और भी उग्र हो गया जब धरना स्थल पर गोलीबारी की घटना में एक छात्र घायल हो गया. आरोप लगाया गया कि राजा मामून फहद नाम के एक व्यक्ति ने छात्रों पर गोलियां चलाईं और फिर मौके से भाग गया. कहा जा रहा है कि यह घटना कथित तौर पर पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में हुई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई.