जापान में मुस्लिम समुदाय की कब्रिस्तानों पर रोक लगी है। जापान सरकार ने अपने देश में मुस्लिम कब्रिस्तानों को बंद करने की घोषणा की है। अधिकारियों का कहना है कि जापान में शवदाह संस्कृति प्रचलित है इसलिए मुसलमानों को मृतकों की अस्थियां मृतकों के मूल देश वापस भेजनी पड़ेंगी जिसकी व्यवस्था में सरकार मदद देगी।

बता दें कि जापान में मुसलमानों की संख्या लगभग 2 लाख है, जो ज्यादातर इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों से आने वाले प्रवासी मजदूर हैं। 2025 के इस नए कानून को लागू किए जाने पर मुस्लिम समुदाय ने विरोध जताया है, लेकिन जापानी कानून में विदेशी धार्मिक प्रथाओं को स्थानीय नियमों के अधीन रखा जाता है।

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जापान के ओसाका शहर में केवल एक मुस्लिम कब्रिस्तान है। अब नए आदेश के मुताबिक वह भी बंद की जाएगी। इसके अलावा मस्जिद बनाने और नमाज के लिए लाउडस्पीकर पर आह्वान के अलावा सड़क पर नमाज पर भी संसद के कानून के तहत पहले से ही बैन है।

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जापान में काफी समय से मुस्लिम समुदाय कब्रिस्तान की मांग कर रहे हैं। इस पर कुछ समय पहले जापानी सांसद उमेमुरा ने कहा था कि मुस्लिम कब्रिस्तानों की मांग स्वीकार नहीं किया जाएगा। कहा कि जापान में दाह-संस्कार परंपरा है। उपाय बताते हुए सांसद ने कहा था कि मुसलमानों के लिए उचित तरीका यही है कि वे शव को मूल देश भेज दें और वहीं दफनाएं। अब जापान की प्रधानमंत्री सानेए ताकाइची बन चुकी हैं। उन्हें जापान फर्स्ट की नीति के लिए जाना जाता है। ताकाइची कई बार स्पष्ट कर चुकी हैं कि विदेशी कामगारों का स्वागत है, लेकिन उन्हें जापान के नियम-कानून और परंपराओं का पालन करना होगा।