ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारिजानी की एक भीषण सैन्य हमले में मौत के बाद पूरे देश में मातम और गुस्से का माहौल है. सरकारी प्रेस टीवी के अनुसार. यह हमला इजरायल और अमेरिका की ओर से संयुक्त रूप से किया गया था. जिसमें लारिजानी के साथ उनके बेटे मुर्तजा लारिजानी. डिप्टी अलीरेजा बयात और कई सुरक्षा कर्मियों की जान चली गई. इस घटना के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने बेहद सख्त लहजे में दुश्मन देशों को चेतावनी दी है. उन्होंने साफ कहा कि इस कायराना हरकत को अंजाम देने वाले गुनहगारों को जल्द ही अपने किए की भारी कीमत चुकानी होगी. लारिजानी की हत्या को ईरान की सुरक्षा व्यवस्था के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है. क्योंकि वे न केवल एक रणनीतिकार थे. बल्कि सत्ता के विभिन्न केंद्रों के बीच संतुलन बनाए रखने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी भी थे.

'बेहद करीबी साथी और महान देशभक्त को खो दिया'

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने इस हमले पर गहरा दुख जताते हुए अली लारिजानी को अपना 'बेहद करीबी साथी' बताया है. राष्ट्रपति ने भावुक होते हुए कहा कि लारिजानी ने इस्लामिक गणराज्य के गठन से लेकर अब तक कई अहम पदों पर रहकर देश की निस्वार्थ सेवा की थी. उनके जैसा कद्दावर और सूझबूझ वाला नेता मिलना भविष्य में बहुत मुश्किल होगा. पेजेशकियान ने जोर देकर कहा कि लारिजानी ने हमेशा मध्य पूर्व क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दिन-रात मेहनत की. उन्होंने दोहराया कि निर्दोषों के खून की एक-एक बूंद का हिसाब लिया जाएगा और इस हमले के मास्टरमाइंड को ऐसी सजा दी जाएगी जिसे दुनिया याद रखेगी. इस बयान ने साफ कर दिया है कि ईरान अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है.

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ईरानी नेतृत्व की एकजुटता

अली लारिजानी की मौत पर ईरान के अन्य शीर्ष नेताओं ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है. संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालिबफ ने उन्हें एक 'निडर और समर्पित' योद्धा बताया. जिन्होंने कभी भी दुश्मन के सामने घुटने नहीं टेके. कालिबफ के अनुसार. ऐसी महान शहादत हर किसी के नसीब में नहीं होती और यह लारिजानी के सच्चे चरित्र की पहचान है. वहीं. न्यायपालिका प्रमुख मोहसेनी एजिज ने कहा कि लारिजानी ने अपने लंबे और संघर्षपूर्ण जीवन का अंत एक वीर की तरह किया है. ईरानी नेतृत्व ने पूरी दुनिया को यह संदेश दिया है कि इस तरह के हमलों से देश का रास्ता नहीं बदलेगा. बल्कि सेना और जनता का संकल्प और भी मजबूत होगा. ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने शीर्ष कमांडरों की हत्या का बदला लेने के लिए सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा.

क्या ईरान संभाल पाएगा यह बड़ा झटका?

ईरान. अमेरिका और इजरायल के बीच जारी इस खूनी संघर्ष में अब तक कई बड़े नाम काल के गाल में समा चुके हैं. अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ सैन्य कमांडरों के बाद अब अली लारिजानी को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि दुश्मन देश सीधे तौर पर ईरान के 'कंट्रोल टॉवर' पर हमला कर रहे हैं. हालांकि. ईरान का इतिहास रहा है कि उसने पहले भी ऐसे कई बड़े झटकों को झेला है. लेकिन इस बार लगातार हो रहे हाई-प्रोफाइल हमलों ने देश के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. युद्ध के इस नाजुक मोड़ पर लारिजानी जैसे अनुभवी नेता की जगह भरना आसान नहीं होगा. जिससे देश के शीर्ष नेतृत्व में असंतुलन का खतरा बढ़ गया है. अब पूरी दुनिया की नजरें ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इस 'खून की कीमत' कैसे वसूलता है.