भारतीय पीएचडी स्टूडेंट रंजनी श्रीनिवासन को उम्मीद है कि यूएस की कोलंबिया यूनिवर्सिटी उनके नामांकन बहाली की अपील पर सुनवाई करेगी। रंजनी ने दावा किया कि वे अपना कोर्स पूरा करना चाहती हैं। रंजनी पर हमास का समर्थन करने के आरोप लगे थे, जिसके बाद उनका छात्र वीजा रद्द कर दिया गया था। अब रंजनी ने खुद के कनाडा में होने की बात कही है। रंजनी ने आरोप लगाए कि कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें धोखा दिया गया है। अल जजीरा के साथ एक साक्षात्कार में श्रीनिवासन ने कहा कि उन्हें कभी इस बात का आभास नहीं था कि कोलंबिया यूनिवर्सिटी उनके साथ ऐसा करेगी।
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उन्होंने कोलंबिया में 5 साल बिताए। सप्ताह में 100-100 घंटे तक काम किया, लेकिन संस्थान ने उनको धोखा दे दिया। उनका वीजा पिछले साल दिसंबर में रिन्यू किया गया था, जिसे हमास का समर्थन करने के आरोपों के चलते ट्रंप प्रशासन ने रद्द कर दिया। वे कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पब्लिक प्लानिंग से पीएचडी कर रही थीं। रंजनी को अब भी उम्मीद है कि उनका नामांकन कोलंबिया यूनिवर्सिटी बहाल कर देगी।
5 मार्च को मिला ईमेल
रंजनी के अनुसार एक दिन यूनिवर्सिटी को अपनी गलती का अहसास होगा और उनको दोबारा डॉक्टरेट की डिग्री करने का मौका मिलेगा। उनकी पीएचडी पूरी होने ही वाली थी, बाकी सिलेबस के लिए उनको अमेरिका में रहने की जरूरत भी नहीं है। मैंने अपील की है कि कनाडा से ही पढ़ाई को पूरा करने का मौका दिया जाए। बता दें कि रंजनी न्यूयॉर्क की कोलंबिया यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट थीं। 37 साल की रंजनी श्रीनिवासन को पहली बार 5 मार्च को संयुक्त राज्य अमेरिका के वाणिज्य दूतावास से एक ईमेल मिला था। इसमें कहा गया था कि उनका छात्र वीजा रद्द कर दिया गया है। वे कुछ समझ पातीं, तभी ICE एजेंट उनके दरवाजे पर आ गए।
तस्वीर हुई थी वायरल
उनके ऊपर अमेरिकी गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में हमास के समर्थन करने के आरोप लगाए थे। नोएम के पोस्ट से 4 दिन पहले वे 11 मार्च को न्यूयॉर्क से कनाडा चली गई थीं। उनकी एक तस्वीर भी वायरल हुई थी, जो न्यूयॉर्क के लागार्डिया हवाई अड्डे के सीसीटीवी कैमरे की थी। तस्वीर में वे अपने साथ सूटकेस ले जाती दिखी थीं। बताया जा रहा है कि वे फिलहाल अपने दोस्तों और परिवार के साथ कनाडा में हैं।
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