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क्या है मोदी-मैक्रों के बीच होने वाली 3.25 लाख करोड़ की महाडील? जो चीन-पाकिस्तान की उड़ा देगी नींद

तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर भारत आए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का सबसे बड़ा फोकस भारत और फ्रांस के बीच प्रस्तावित राफेल लड़ाकू विमानों की बड़ी डील है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये है. यह भारत की आजादी के बाद की सबसे बड़ी हथियार खरीद मानी जा रही है.

Rafale Mega Deal: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण 3.25 लाख करोड़ रुपये की वह महाडील है, जो भारतीय वायुसेना (IAF) की ताकत को कई गुना बढ़ा देगी. इस डील के तहत भारत आ रहे हैं F5 वर्जन वाले 24 'सुपर राफेल', जो चीन-पाकिस्तान की नींद उड़ा देंगे. इसके अलावा फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन से 114 राफेल मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) खरीदे जाएंगे. डील की खास बात यह है कि 114 विमानों में से केवल 18 विमान फ्रांस से सीधे 'ऑफ-द-शेल्फ' (तैयार माल) के रूप में खरीदे जाएंगे. बाकी 96 विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा. इससे भारत के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नई ऊंचाई मिलेगी.

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भारत के पास अब 36 नहीं, 150 होंगे राफेल

भारत की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने हाल ही में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी है. इस डील में विमानों के अलावा रखरखाव, ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक्स और स्कैल्प जैसी मिसाइल सिस्टम भी शामिल हैं. यह डील 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को बढ़ावा देगी, क्योंकि इसमें टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा, जिससे भारत खुद ऐसे विमान बना सकेगा. अभी तक भारत के पास केवल 36 राफेल विमान हैं. इस नई डील के बाद यह संख्या 150 के करीब पहुंच जाएगी, जिससे वायुसेना की स्ट्राइक पावर में 50 फीसदी तक का इजाफा होगा.

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यह डील न सिर्फ रक्षा क्षेत्र को मजबूत करेगी, बल्कि भारत-फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देगी. दोनों देश पहले से ही स्कॉर्पीन पनडुब्बियों जैसे प्रोजेक्ट्स पर सहयोग कर रहे हैं, और यह दौरा उस साझेदारी को और गहरा करेगा.

क्या है 'सुपर राफेल' F5?

राफेल एक फ्रांसीसी मल्टी-रोल लड़ाकू विमान है, जो जल, थल और आकाश तीनों क्षेत्रों में प्रभावी है. महाडील में सबसे ज्यादा चर्चा 24 सुपर राफेल (F5 वर्जन) की है. इसमें से 24 विमान 'सुपर राफेल' के रूप में होंगे, जो F-5 के प्रोटोटाइप हैं. फ्रांस इन्हें 2030 तक डिलीवर करेगा. यह राफेल का सबसे आधुनिक वर्जन है, जो न केवल स्टेल्थ तकनीक (रडार से बचने की क्षमता) से लैस है, बल्कि यह भविष्य के खतरनाक ड्रोन्स के साथ तालमेल बिठाकर युद्ध लड़ने में सक्षम है. इसमें एडवांस सेंसर और लंबी दूरी की घातक मिसाइलें लगी होंगी. भारत के पास मौजूदा राफेल F-3 वेरिएंट के हैं, जो 4.5 जेनरेशन के हैं. नई डील में ज्यादातर विमान F-4 वेरिएंट के होंगे, जो अधिक उन्नत सिस्टम और तकनीक से लैस होंगे.

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