Impeachment Motion Process: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप को अपने खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश होने का डर सता रहा है. अपने पहले कार्यकाल में वे 2 बार महाभियोग का सामना कर चुके हैं और अब अगर उनके खिलाफ महाभियोग आया तो यह तीसरी बार होगा. क्योंकि महाभियोग प्रस्ताव पारित होने से उन्हें पद छोड़ना पड़ सकता है, इस चिंता से उन्होंने अपनी रिपब्लिकन पार्टी को चेतावनी दे दी है कि उन्हें मिडटर्म इलेक्शन 2026 जीतना ही होगा, अन्यथा वे अपनी राष्ट्रपति पद की कुर्सी गंवा देंगे.
महाभियोग प्रस्ताव क्यों पेश किया जाता?
महाभियोग प्रस्ताव संविधान के तहत निर्धारित एक प्रक्रिया है, जिसके जरिए उच्च संवैधानिक पदाधिकारियों जैसे राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री को उनके पद से हटाया जा सकता है. अमेरिका के संविधान के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति को देशद्रोह के मामले में, रिश्वत लेने पर या किसी अन्य गंभीर अपराध और दुष्कर्म के मामले में आरोपी होने पर या दोषी साबित होने पर, सजा होने पर महाभियोग प्रस्ताव पास करके पद से हटाया जा सकता है, लेकिन आज तक किसी राष्ट्रपति को महाभियोग प्रस्ताव के तहत हटाया नहीं गया है.
---विज्ञापन---
कौन पेश करता है महाभियोग प्रस्ताव?
बता दें कि अमेरिका में राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव कांग्रेस का हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स पेश करता है, जिसके सदस्य राज्य की जनसंख्या के आधार पर चुने जाते हैं. महाभियोग प्रस्ताव पेश करने के लिए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के 51 प्रतिशत सदस्यों का बहुमत जरूरी है.
---विज्ञापन---
प्रस्ताव पेश करने के बाद क्या होता है?
प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद ट्रायल होता है, जिसके तहत आरोपों की जांच की जाती है. ट्रायल की अध्यक्षता अमेरिका की सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश करता है. वहीं राष्ट्रपति भी अपनी तरफ से एक वकील नियुक्त कर सकता है. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के सदस्य और सीनेटर निर्णायक मंडल भी भूमिका निभाते हैं.
ट्रायल के आखिरी चरण में सीनेट के सदस्य वोट करते हैं और अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में सीनेट के कम-से-कम दो-तिहाई (67 प्रतिशत) सदस्यों का बहुमत जरूरी है. अगर 67 प्रतिशत सीनेटर राष्ट्रपति को दोषी मानते हैं तो राष्ट्रपति को पद से हटा दिया जाता है. राष्ट्रपति के पद छोड़ने के बाद बाकी कार्यकाल उप-राष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति बनकर पूरा करते हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ 2 महाभियोग
बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ उनके पहले राष्ट्रपति कार्यकाल में 2 महाभियोग प्रस्ताव पेश किए गए थे. एक साल 2019 में और दूसरा साल 2021 में पेश किया गया था. साल 2019 में साल 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में किसी दूसरे पर दबाव डालकर दखल देने के आरोप में महाभियोग प्रस्ताव लाकर जांच कराई गई थी, जो जांच और सीनेटर्स की वोटों के आधार पर खारिज हो गया.
इसके बाद साल 2021 में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव इसलिए पेश किया गया था, क्योंकि उन्होंने अमेरिका के खिलाफ विद्रोह को उकसाने की कोशिश की थी और साल 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के परिणामों को पलटने का प्रयास किया था.
इन 2 के खिलाफ भी आया महाभियोग
बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अलावा 1868 में राष्ट्रपति रहे एंड्रयू जॉनसन और 1998 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के खिलाप भी महाभियोग प्रस्ताव पेश हुआ था. एंड्रयू जॉनसन कांग्रेस के कट्टर विरोधी थे, लेकिन वे अपनी शक्तियों का दुरुपयोग न करें, इसके लिए जॉनसन की वीटो पॉवर पर ऑफिस एक्ट लागू किया गया था, जिसका सरेआम उल्लंघन किया गया, इसलिए उनके खिलाफ महाभियोग लाया गया.
बिल क्लिंटन के खिलाफ महाभियोग झूठी गवाही देने और न्याय प्रक्रिया में बाधा डालने के आरोप में लाया गया था. बिल क्लिंटन पर व्हाइट हाउस की इंटर्न मोनिका लेविंस्की के साथ संबंध बनाने के आरोप लगे थे, जिसे उन्होंने सिरे से खारिज किया था और अपने पक्ष में झूठी गवाही दिलाकर न्याय प्रक्रिया में बाधा डाली थी.