US vs Greenland Update: अमेरिकी राष्ट्रपति जहां ईरान को लेकर सख्त रवैया अपनाए हुए हैं, वहीं ग्रीनलैंड को लेकर भी उन्होंने कड़ रुख अपनाया हुआ है और वे अब ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए हमला करने की तैयारी में हैं. उन्होंने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की प्लान बनाने की जिम्मेदारी जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड (JSOC) को सौंप दी है. दूसरी ओर, अमेरिकी संसद में ग्रीनलैंड के अधिग्रहण का बिल भी पेश हो गया है, जो पास हो गया तो ट्रंप को ग्रीनलैंड पर कार्रवाई करने का अधिकार मिल जाएगा.
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बिल पास हुआ तो ट्रंप का होगा ये फायदा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की अपनी मंशा को धरातल पर उतारना शुरू कर दिया है. इसके लिए अमेरिका के सत्तारूढ़ दल रिपब्लिकन पार्टी के फ्लोरिडा से सांसद रैंडी फाइन ने बीते दिन सोमवार को अमेरिका की संसद में एक बिल पेश किया, जिसे ‘ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट’ नाम दिया गया है. इस बिल में प्रावधान किया गया है कि अमेरिका ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में ले सकता है और अमेरिका की ट्रंप सरकार उसे अमेरिका का एक राज्य बना सकती है.
बिल में किया गया है यह प्रमुख प्रावधान
बता दें कि अमेरिकी की ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोशिश की इंटरनेशनल लेवल पर विरोध हो रहा है, बावजदू इसके ग्रीनलैंड के अधिग्रहण के लिए बिल पेश किया गया है और इसके पास होने पर ट्रंप सरकार को ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए जरूरी कदम उठाने का अधिकार मिल जाएगा. इसमें प्रावधान किया गया है कि सत्तारूढ़ दल को ग्रीनलैंड को अमेरिका का राज्य बनाने के बाद उसमें किए जाने वाले सुधारों और विकास कार्यों को लेकर एक रिपोर्ट जारी करनी होगी.
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डेनमार्क-ग्रीनलैंड अमेरिकी प्रस्ताव के विरोधी
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उनके समर्थकों ने ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है. वहीं डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने राष्ट्रपति ट्रंप की कोशिश को अपमानजनक के साथ-साथ नाटो को तोड़ने का प्रयास बताया है.डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने ट्रंप को कड़ा जवाब देते हुए कहा है कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है. अमेरिका को ग्रीनलैंड पर कब्जा करने का अधिकार नहीं है.ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने भी अमेरिका के प्रस्ताव को खारिज किया है.
यूरोपीय देशों ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड का समर्थन किया है और कहा है कि ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला सिर्फ वहां के लोगों को लेने का अधिकार है. नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड और फ्रांस के नेताओं ने भी ट्रंप के प्रस्ताव का विरोध किया है. पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टुस्क ने चेतावनी दी कि ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की अमेरिका और ट्रंप की कोशिश NATO के भविष्य के लिए भी खतरा है.
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