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ईरान-इजरायल युद्ध को रोकना चाहते हैं ट्रंप? राष्ट्रपति ट्रंप ने नाटो देशों से की सहयोग की अपील

एक कहावत है चौबे गए छब्बे बनने, दुबे बनके लौटे,यह कहावत शायद सटीक बैठ गई है, अमेरिकी राष्ट्रपति के ऊपर, क्योंकि ईरान से युद्ध शुरू करने से पहले ही दावा किया था कि ईरान को 48 घंटे में ही नेस्तनाबूद कर देंगे, लेकिन अब वही राष्ट्रपति जो खुद को पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा ताकतवर मानते हैं, अब नाटो देशों से सहयोग की अपील करते नजर आ रहे हैं.

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अमेरिकी राष्ट्रपति अटॉर्नी जनरल और सेना प्रमुख दोनों से नाराज हैं।

एक कहावत है चौबे गए छब्बे बनने, दुबे बनके लौटे,यह कहावत शायद सटीक बैठ गई है, अमेरिकी राष्ट्रपति के ऊपर, क्योंकि ईरान से युद्ध शुरू करने से पहले ही दावा किया था कि ईरान को 48 घंटे में ही नेस्तनाबूद कर देंगे, लेकिन अब वही राष्ट्रपति जो खुद को पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा ताकतवर मानते हैं, अब नाटो देशों से सहयोग की अपील करते नजर आ रहे हैं.

अब एक नया खुलासा अमेरिकी आयोग ने अपनी ताजा रिपोर्ट में किया है. रिपोर्ट के जरिए यह दावा किया गया है कि चीन की तरफ से ईरान को भारी मात्रा में रक्षा मदद दी जा रही है.

आपको बता दें कि U.S.-China Economic and Security Review Commission की ताजा रिपोर्ट में चीन और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग को लेकर कई खुलासे किए गए हैं.

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अपनी रिपोर्ट में U.S.-China Economic and Security Review Commission ने यह जिक्र किया है कि ईरान के पास घातक ड्रोन और रॉकेट ईंधन बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल उपलब्ध चीन की तरफ से दिया जा रहा है. इसमें खास तौर पर सोडियम परक्लोरेट शामिल है, जो मिसाइलों के ठोस ईंधन का अहम साथी माना जाता है.

अपनी रिपोर्ट में U.S.-China Economic and Security Review Commission ने यह दावा किया है कि साल 2026 के मार्च महीने के पहले हफ्ते में दो ईरानी जहाज चीन के गावरान पोर्ट से रवाना हुए थे, और इस जहाज को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि इसमें रॉकेट ईंधन से जुड़ा सामान हो सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2025 में भी चीन करीब 1000 टन सोडियम परक्लोरेट ईरान भेज चुका है.

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बौखलाए अमेरिका की U.S.-China Economic and Security Review Commission की रिपोर्ट में सबसे अहम खुलासा यह किया गया है कि
ईरान अब चीन के सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम BeiDou Navigation Satellite System का इस्तेमाल कर सकता है. क्योंकि इस सिस्टम से जुड़े डिफेंस के सभी सामान चीन ने 5 साल पहले यानी 2021 में ही दे दी थी.

रिपोर्ट में दावा करते हुए बताया गया है कि एक बड़ी रक्षा डील जिसमें कई घातक आर्म्स को खरीदने के लिए सीधे तौर पर यानी बिना मीडियेटर एंटी-शिप क्रूज मिसाइल खरीदने की पूरी तैयारी ईरान के तरफ से हो चुकी थी और इसके लिए ईरान और इजरायल के भी कई बार मीटिंग भी हो चुकी थी.

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रिपोर्ट के मुताबिक ईरान और चीन Shanghai Cooperation Organisation और BRICS जैसे मंचों के जरिए अपनी सैन्य साझेदारी को और मजबूत कर रहे हैं.

यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब मिडिल ईस्ट में लड़ाई थमने का नाम नहीं ले रही है और तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है.

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