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भगदड़ के बाद Maha kumbh से आई गुड न्यूज, 27 साल से बिछड़ा शख्स परिवार से मिला

Maha kumbh : महाकुंभ में करीब तीन दशक पहले बिछड़े एक शख्स के मिलने की बात सामने आ रही है। शख्स को खोजते-खोजते परिजन प्रयागराज के महाकुंभ पहुंचे हैं।

Maha kumbh : प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ से एक से बढ़कर एक खबरें निकलकर सामने आ रही हैं। अब एक दिल को छू लेने वाली कहानी सामने आई है। लगभग तीन दशक से लापता शख्स अपने परिजनों को मिला है। 27 साल पहले लापता हुए शख्स को लेकर दावा है कि वह महाकुंभ में हैं और परिजन उनसे मिलने की कोशिश में लगे हैं।

क्या है पूरी कहानी?

परिवार का दावा है कि 1998 में गंगासागर यादव नाम का शख्स लापता हो गया था, जो अब अघोरी साधु बन गया है। अघोरी बनने के बाद गंगासागर अब बाबा राजकुमार के नाम से जाने जाते हैं। गंगासागर की उम्र अब 65 हो चुकी होगी। वह 1998 में पटना से अचानक गायब हो गए थे। तब से लेकर परिवार को उनके बारे कोई खबर नहीं मिली। गंगासागर यादव के लापता होने के बाद उनकी पत्नी धनवा देवी ने अपने दोनों बेटों कमलेश और विमलेश को पाल पोसकर बड़ा किए। अब कहा जा रहा है कि गंगासागर कुंभ मेले में मौजूद हैं और वह राजकुमार नाम अपनाकर वे एक खास साधु समुदाय में शामिल हो गए हैं। गंगासागर के छोटे भाई मुरली यादव का कहना है कि भाई को फिर से पाने की सारी उम्मीद खो चुके थे लेकिन हाल ही में किसी ने बताया कि महाकुंभ में गंगासागर जैसा दिखने वाला साधु मौजूद था। उन्होंने साधु की फोटो खींच ली और उसने हमें भेज दी। फोटो देखते ही हम महाकुंभ में पहुंच गए और बाबा से मुलाकात की लेकिन बाबा राजकुमार का कहना है कि वह वाराणसी के साधु हैं और उनका गंगासागर से कोई संबंध नहीं है। बाबा के साथ मौजूद एक साध्वी ने भी उनकी बातों की पुष्टि की। बाबा राजकुमार के इनकार के बाद भी परिवार अपनी बात पर अड़ा रहा। परिवार ने उनके शरीर के निशान, दांत आदि से उनकी पहचान की और इसकी जानकारी पुलिस को दी है। यह भी पढ़ें : Maha kumbh में Girlfriend की वजह से हजारों कमा रहा ये लड़का, वीडियो में बता रहा पूरी कहानी पुलिस से परिजनों ने अनुरोध किया है कि वह बाबा राजकुमार का डीएनए परीक्षण करवाएं। गंगासागर के भाई मुरली यादव ने कहा, "हम कुंभ मेला समाप्त होने तक इंतजार करेंगे और यदि आवश्यक हुआ तो हम डीएनए परीक्षण करायेंगे। यदि हम गलत साबित होते हैं तो बाबा राजकुमार से माफी भी मागेंगे। अब यह पूरी प्रक्रिया कुंभ मेले के समापन के बाद शुरू हो जाएगी। परिवार के कुछ लोग कुंभ में ही रुके हैं और बाबा पर नजर रखे हुए हैं।


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