DLF Director Pia Singh : DLF का नाम आपने सुना ही होगा जो मॉल, रियल एस्टेट जैसे कई क्षेत्रों में कारोबार करता है। DLF के संस्थापक कुशल पाल सिंह हैं लेकिन उनकी बेटी पिया सिंह को जानते हैं आप? पिया सिंह उद्योग जगत में एक जाना माना नाम है। पिया सिंह DLF कंपनी के कई महत्वपूर्ण पदों पर बड़ी जिम्मेदारी निभा रही हैं।
कौन हैं पिया सिंह?
पिया सिंह DLF के संस्थापक कुशल पाल सिंह के तीन बच्चों में सबसे छोटी हैं और 20 वर्ष की उम्र से ही परिवार की कंपनी के साथ जुड़ गई थीं। अभी भी वह डीएलएफ में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वह DLF के मनोरंजन उपक्रमों की अध्यक्ष, डीटी सिनेमा की प्रबंध निदेशक, 2003 से डीएलएफ के बोर्ड में निदेशक हैं।
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पिया ने प्रतिष्ठित व्हार्टन स्कूल से फाइनेंस में डिग्री प्राप्त की है और उन्होंने न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय से फिल्म मेकिंग की भी पढ़ाई की है। पिया की शादी सरना एक्सपोर्ट्स के मालिक टिम्मी सरना से हुई है। विवाह के बाद टिम्मी ने DLF से जुड़े और मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में कार्य किया। इस जोड़े के तीन बच्चे हैं और ये दिल्ली के औरंगजेब रोड पर मौजूद भव्य महल में रहते हैं।
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डीएलएफ में शामिल होने से पहले, पिया ने जीई कैपिटल में जोखिम प्रबंधन प्रभाग (Risk Management Division) में काम किया, जहां से उन्हें व्यापारिक अनुभव प्राप्त हुआ। साल 2008 में पिया सिंह ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया। उन्होंने भारत का पहला लक्जरी मॉल, डीएलएफ एम्पोरियो लॉन्च किया और दुनिया के हाई क्वालिटी ब्रांड को भारत में पहुंच बनाने का मौका मिला।
कितनी है नेट वर्थ?
रिपोर्ट्स के अनुसार, पिया सिंह लगभग 814.3 करोड़ रुपये की निजी संपत्ति की मालिक हैं। वहीं, फोर्ब्स द्वारा भारत की सबसे शक्तिशाली महिलाओं में भी पिया सिंह का नाम शामिल है। पिया सिंह हाई-प्रोफाइल आयोजनों के अपने प्यार के लिए जानी जाती हैं और वह अक्सर दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में पेज-थ्री पार्टियों में शामिल होती हैं।
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DLF कंपनी का इतिहास
डीएलएफ लिमिटेड को पहले दिल्ली लैंड एंड फाइनेंस के नाम से जाना जाता था। यह एक भारतीय कॉमर्स रियल एस्टेट कंपनी है। इसकी स्थापना 1946 में चौधरी राघवेंद्र सिंह ने की थी। डीएलएफ ने दिल्ली में मॉडल टाउन, राजौरी गार्डन, कृष्णा नगर, साउथ एक्सटेंशन, ग्रेटर कैलाश, कैलाश कॉलोनी और हौज खास जैसी आवासीय कॉलोनियां विकसित की हैं। 1957 में दिल्ली विकास अधिनियम के बाद सरकार ने प्राइवेट रियल एस्टेट डेवलपर्स को दिल्ली में प्रतिबंधित कर दिया। इसके बाद DLF ने गुरुग्राम का रुख किया। 1970 के बाद कंपनी ने गुड़गांव में अपने डीएलएफ सिटी प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया।