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गुफा में मिला 60000 साल पुराना जहरीला तीर, वैज्ञानिकों की इस खोज से खुला मानव जीवन का अनोखा रहस्य

गुफा में मिले 60000 साल पुराने जहरीले तीर ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है. इस दुर्लभ खोज से प्राचीन मानव के शिकार, सुरक्षा और जीवनशैली से जुड़े अनोखे राज सामने आए हैं.

दक्षिण अफ्रीका की एक गुफा में वैज्ञानिकों को शिकार में इस्तेमाल होने वाले ऐसे जहरीले तीर मिले हैं, जो लगभग 60,000 साल पुराने बताए जा रहे हैं. इस खोज ने यह साबित कर दिया है कि प्राचीन काल के इंसान हमारी सोच से कहीं ज्यादा समझदार थे और बहुत पहले से ही उन्नत हथियारों का इस्तेमाल करना जानते थे. स्वीडन और दक्षिण अफ्रीका के शोधकर्ताओं ने क्वाजुलु-नताल इलाके की उम्लातुजाना रॉक शेल्टर नाम की गुफा से क्वार्ट्ज के बने इन तीरों को ढूंढ निकाला है. यह खोज दिखाती है कि उस दौर का मानव न केवल औजार बनाना जानता था, बल्कि उसने प्रकृति में मौजूद जहर का इस्तेमाल करना भी सीख लिया था.

प्राचीन शिकार की अनोखी तकनीक

वैज्ञानिकों के मुताबिक इन तीरों पर लगाया गया जहर शिकार को तुरंत नहीं मारता था, बल्कि उसकी रफ्तार को धीमा कर देता था ताकि उसे आसानी से पकड़ा जा सके. जांच में पता चला है कि यह जहर दक्षिण अफ्रीका के स्थानीय जहरीले पौधे 'बूफोन डिस्टिका' के कंद से तैयार किया गया था. यह पौधा इतना खतरनाक है कि यह चूहे को महज 20-30 मिनट में मार सकता है और इंसानों में कमजोरी और धुंधली नजर जैसी दिक्कतें पैदा करता है. खास बात यह है कि यही जहर बाद के ऐतिहासिक काल में भी तीरों पर लगा हुआ पाया गया है, जो इस परंपरा की निरंतरता को दर्शाता है.

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प्राचीन मानव की उन्नत सोच और दिमागी क्षमता

इस खोज के सबसे महत्वपूर्ण पहलू पर बात करते हुए स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर स्वेन इसाकसन ने बताया कि यह प्राचीन इंसानों की 'कारण और प्रभाव' समझने की क्षमता को दर्शाता है. उन्हें पता था कि किसी पदार्थ को तीर पर लगाने से उसका असर कई घंटों बाद होगा, जो उनके भविष्य के बारे में सोचने के नजरिए को पेश करता है. इससे पहले दुनिया में सबसे पुराने जहरीले तीर लगभग 4,000 से 8,000 साल पुराने माने जाते थे, लेकिन इस नई खोज ने इतिहास को हजारों साल पीछे धकेल दिया है. यह साबित करता है कि प्लेइस्टोसिन युग के शिकारी बहुत ही जटिल सोच और सांस्कृतिक ज्ञान के धनी थे.

मिट्टी में हजारों सालों तक सुरक्षित रहा जहर का अवशेष

शोधकर्ताओं के लिए यह भी हैरानी की बात रही कि इतने हजार साल गुजर जाने के बाद भी जहर के अंश तीरों पर मौजूद मिले. लैब में किए गए रसायनिक विश्लेषण से पता चला कि यह जहर मिट्टी के भीतर लंबे समय तक स्थिर रह सकता है. वैज्ञानिकों ने तीरों पर मौजूद चिपचिपे अवशेषों की बारीकी से जांच की जिससे प्राचीन शिकार की रणनीतियों और रसायनों के ज्ञान का पता चला है. इस खोज ने न केवल मानव विकास की कहानी में एक नया अध्याय जोड़ दिया है, बल्कि यह भी बताया है कि आज से हजारों साल पहले भी इंसान अपनी उत्तरजीविता के लिए बेहद परिष्कृत तकनीकों का सहारा लेता था.


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