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Raxaul-Haldia Expressway: पटना से नेपाल जाना होगा और आसान, रक्सौल से हल्दिया तक बनेगा नया एक्सप्रेसवे, 13 घंटे में पूरा होगा 18 घंटे का सफर

Raxaul-Haldia Expressway: केंद्र सरकार ने रक्सौल से हल्दिया लेन एक्सप्रेसवे को मंजूरी दे दी है। इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद कई जिलों का विकास होगा। साथ ही नेपाल से भी कनेक्टिविटी बढ़ेगी। किसानों और व्यापारियों को फायदा होगा और यात्रा का समय भी कम होगा।

रक्सौल से हल्दिया एक्सप्रेसवे के निर्मान को मिली मंजूरी Source- Freepik
Raxaul-Haldia Expressway: केंद्र सरकार की ओर से रक्सौल से हल्दिया तक वाले सिक्स लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना को झंडी मिल चुकी है। बता दें कि इस एक्सप्रेसवे के बनने के लिए 54,000 करोड़ रुपये का बजट तैयार किया गया। परियोजना बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के अलावा नेपाल के लिए भी कनेक्टिविटी बढ़ाएगी। बताया जा रहा है कि इस एक्सप्रेसवे के असाइनमेंट को मंजूरी मिलने के बाद 2028 तक इसे पूरा कर लिया जाएगा। वहीं, ये एक्सप्रेसवे बिहार के 8 जिलों मुजफ्फरपुर, लखीसराय, पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर, शिवहर, जमुई, बेगूसराय और मुंगेर से कनेक्ट होगी। वहीं, झारखंड के देवघर, दुमका, जामताड़ा जिलों से होते हुए पश्चिम बंगाल के हल्दिया पोर्ट से कनेक्ट होगी।

क्या मिलेगा फायदा?

ये एक्सप्रेसवे राज्यों के बीच कनेक्टिविटी ही नहीं बल्कि बिहार और झारखंड के विकास में भी अपना योगदान देगी। हल्दिया पोर्ट तक सीधी पहुंच से इन राज्यों के औद्योगिक और कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जगह मिलेगी। खासकर बिहार के किसानों को फायदा होगा। वहीं यात्रा के दौरान रक्सौल से हल्दिया में समय की बचत होगी। अब लोग 17 से 18 घंटे के बजाय सिर्फ 13 घंटे में ये दूरी तय कर सकेंगे। ये भी पढ़ें- 508 किमी रूट, 320 KMPH स्पीड… महज इतने घंटे में मुंबई से अहमदाबाद पहुंचाएगी बुलेट ट्रेन, जापान में ट्रायल शुरू 

सुरक्षित तरीके से कर सकेंगे यात्रा

कहा जा रहा है कि ये एक्सप्रेसवे एक एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे होगा, जिसमें तय की गई केवल प्रवेश बिंदुओं से ही गाड़ियों की आवाजाही होगी। ये फैसला इस लिए लिया गया ताकि दुर्घटनाओं की संभावना कम हो और लोग अपनी यात्रा सुरक्षित रूप से कर सकें। इसके साथ ही कोलकाता से पटना जाना भी आसान हो जाएगा।

कई जिलों में बढ़ेगी रोजगार

इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। साथ ही 3 साल के अंदर इसका निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। ये एक्सप्रेसवे न केवल सीमावर्ती जिलों जैसे पूर्वी चंपारण और मुजफ्फरपुर में विकास को बढ़ावा देगा बल्कि पूरे क्षेत्र में व्यापार, निवेश और रोजगार को भी बढ़ाएगा। ये भी पढ़ें- भारतीय रेलवे ने जून में 18 ट्रेनें कीं कैंसिल, यहां देखें पूरी लिस्ट 


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