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Joshimath Land Subsidence: ज्योतिर्मठ प्रशासन का बयान, कहा- विकास अब विनाश का कारण बन गया है

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Joshimath Land Subsidence: उत्तराखंड के जोशीमठ में स्थिति गंभीर बनी हुई है। यहां की इमारतों और संरचनाओं में दरारें पड़ना जारी है। इस बीच ज्योतिर्मठ के प्रशासन का बयान सामने आया है। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि विकास अब विनाश का कारण बन गया है क्योंकि पनबिजली परियोजनाओं, सुरंगों ने हमारे शहर को प्रभावित किया है।

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बता दें कि जोशीमठ में लैंडस्लाइड की चपेट में ज्योतिर्मठ परिसर भी आया है। ज्योतिर्मठ में लक्ष्मी नारायण मंदिर के आसपास दरारें पड़ गई हैं। मठ के प्रभारी ब्रह्मचारी मुकुंदानंद ने जानकारी दी कि प्रवेश द्वार, लक्ष्मी नारायण मंदिर और सभागार में दरारें आई हैं। उन्होंने बताया कि मठ के कैंपस में टोटकाचार्य गुफा, त्रिपुर सुंदरी राजराजेश्वरी मंदिर और ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य की गद्दी स्थल है।

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का भी आया बयान

जोशीमठ को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि हम जोशीमठ भूमि मुद्दे की तात्कालिकता के संबंध में उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर रहे हैं। अब, यह अदालत पर है कि वे कितनी जल्दी सुनेंगे और निर्देश देंगे। 500 से अधिक घरों में दरारें आ गई हैं। इसका विश्लेषण किया जाना चाहिए और लोगों को सुरक्षा का आश्वासन दिया जाना चाहिए।

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सीएम धामी ने जाना था हाल

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भूस्खलन प्रभावित इलाकों का निरीक्षण करने और प्रभावित परिवारों से मिलने शनिवार को जोशीमठ पहुंचे। बता दें कि जोशीमठ में मकानों में दरारें आ गई हैं और लोग ठंड में डेरा डाले हुए हैं। यहां करीब 600 घरों और अन्य संरचनाओं में मिट्टी के खिसकने के कारण दरारें आ गई हैं। जमीन धंसने से मकानों में दरारें आने से दहशत का माहौल है।

तीर्थ और पर्यटक स्थल का द्वार है जोशीमठ

बता दें कि जोशीमठ बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब जैसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों का प्रवेश द्वार है और इसे उस स्थान के रूप में जाना जाता है जहां सदियों पहले आदि गुरु शंकराचार्य ने तपस्या की थी।

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समाचार एजेंसी ANI ने बताया कि जोशीमठ-मलारी सीमा सड़क, जो भारत-चीन सीमा को जोड़ती है, जोशीमठ में भूस्खलन के कारण कई स्थानों पर दरारें आ गई हैं।

जोशीमठ में एक मंदिर शुक्रवार की शाम को ढह गया, जो एक साल से अधिक समय से अपने घरों की भारी दरार वाली दीवारों के बीच लगातार भय के साये में जी रहे निवासियों के लिए चिंता का विषय है। शहर के इलाके में घरों की दीवारों और फर्श में दरारें दिन-ब-दिन गहरी होती जा रही हैं, जो लोगों के लिए खतरे की घंटी है।

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