छात्र प्रयागराज से देवरिया आ रहा था
हमेशा की तरह शुक्रवार को भी प्रयागराज से अपने गांव देवरिया के कपूरीपार लौट रहा था। लेकिन जब दुर्गेश अपने घर नहीं पहुंचा,तो परिजनों ने उसे ढूढ़ना शुरू किया। प्रयागराज से 166 km दूर आजमगढ़ में उसका शव मिला। ये सफर दो-ढाई घंटे का है। ऐसा माना जा रहा है इसी बीच दुर्गेश की हत्या की गई है। बदमाशों ने लूट के बाद हत्या करके उसके शव को आजमगढ़ में एक सुनसान जगह पर फेंक दिया था। बदमाश दुर्गेश का सारा सामान, पैसा और कार लेकर फरार हो गए। सोमवार को परिवार को दुर्गेश की हत्या होने की बात पता चली। दुर्गेश का गला कटा हुआ था। उसके चेहरे और सीने पर चोट के गहरे निशान थे।दुर्गेश बचपन से पढाई में होशियार था
दुर्गेश के मामा ने बताया कि वह बचपन से ही पढ़ने में बहुत अच्छा था। वह अपने परिवार की जिम्मेदारी समझता था। दुर्गेश के पिता किसानी करते हैं। उससे ज्यादा कमाई नहीं होती है। दुर्गेश की एक छोटी बहन और भाई भी है। भाई- बहन की पढ़ाई का खर्च भी दुर्गेश ही करता था। दुर्गेश के कमाने के बाद से घर की स्थिति काफी सही हो गई थी। वो रात भर पढ़ता था, सुबह 3-4 घंटे सोता था। फिर दिन में काम करता और गाड़ी चलवाता था। कभी-कभी तो खुद ही सवारी लेकर चला जाता था।
शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया
प्रयागराज में पुलिस से ही जुड़े दुर्गेश मिश्रा के रिश्तेदार अजय त्रिपाठी ने बताया कि इस मामले में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराने प्रयागराज के सिविल लाइन थाने पर गए थे। उन्होने अपनी शिकायत में पुलिस को बताया कि दुर्गेश का मोबाइल रात से स्विच ऑफ आ रहा है। इसके बावजूद सिविल लाइन पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया। वहीं, सिविल लाइन थाने के इंस्पेक्टर भानु प्रताप ने बताया कि इस मामले की शिकायत आई थी। पर दर्ज नहीं की गई। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक हम शिकायत दर्ज करते तब तक युवक की बॉडी बरामद होने की जानकारी मिल चुकी थी। इसी कारण न तो मिसिंग की शिकायत और न ही मुकदमा दर्ज किया गया।फिलहाल पुलिस घटना के रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरे से मामले की जांच कर रही है।---विज्ञापन---
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