Greater Noida News: सालों से अपने सपनों के घर की आस लगाए बैठे आम्रपाली आदर्श आवास योजना के खरीदारों का धैर्य आखिरकार टूट गया. शनिवार को ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित आम्रपाली लेजर वैली प्रोजेक्ट साइट पर सैकड़ों होमबायर्स ने एनबीसीसी (नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन) के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया. खरीदारों ने एनबीसीसी पर बार-बार समय सीमा तय करने के बावजूद फ्लैट्स का कब्जा न देने और निर्माण कार्य में घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया.

एनबीसीसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी

प्रदर्शन सुबह करीब 11 बजे शुरू हुआ और 4 घंटे तक चला. इस दौरान आक्रोशित खरीदारों ने साइट तक जाने वाली सड़कों को जाम कर दिया और एनबीसीसी जवाब दो, घर कब मिलेगा बताओ के नारे लगाए. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में काम हो रहा है, तो फिर देरी का कोई औचित्य नहीं रह जाता.

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साल 2019 में सौंपी थी जिम्मेदारी

गौरतलब है कि 2019 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आम्रपाली समूह की सभी अधूरी परियोजनाओं का निर्माण एनबीसीसी को सौंपा गया था. इसके बाद 2020 में आदर्श आवास योजना पर काम शुरू किया गया, लेकिन रफ्तार बेहद धीमी रही. इस वर्ष एनबीसीसी ने पुराने ठेकेदार को हटाकर नए ठेकेदार की नियुक्ति की थी, मगर निर्माण कार्य की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ.

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2024 तक 22 हजार फ्लैट देने का था वादा

एनबीसीसी ने सुप्रीम कोर्ट को यह आश्वासन दिया था कि 2024 के अंत तक आम्रपाली की सभी परियोजनाओं के 22,000 फ्लैट पूरे कर दिए जाएंगे. इनमें आदर्श आवास योजना के कुल 1,904 फ्लैट्स भी शामिल हैं, जिन्हें मार्च 2025 तक हैंडओवर करने की समय सीमा तय की गई थी. लेकिन साइट पर काम की मौजूदा गति को देखते हुए खरीदारों का कहना है कि अगले डेढ़ साल में भी प्रोजेक्ट पूरा होता नहीं दिख रहा.

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पहले आम्रपाली ने ठगा, अब एनबीसीसी

प्रदर्शन में शामिल होमबायर नितिन अग्रवाल ने कहा कि पहले आम्रपाली ने हमें सालों तक इंतजार कराया और अब एनबीसीसी भी वही कर रही है. अगर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में भी हमें धरने पर बैठना पड़ रहा है, तो फिर न्याय की उम्मीद किससे करें ? वहीं, कई खरीदारों ने कहा कि एनबीसीसी द्वारा कोर्ट में दिए गए वादे सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं.

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साइट पर नहीं पहुंचे एनबीसीसी अधिकारी

प्रदर्शन के दौरान किसी भी एनबीसीसी अधिकारी के मौके पर न पहुंचने से खरीदारों का गुस्सा और बढ़ गया. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट में एनबीसीसी द्वारा खर्च किए गए फंड की जांच की मांग करेंगे और कोर्ट से यह भी अपील करेंगे कि एनबीसीसी एक हलफनामा (एफिडेविट) देकर बताए कि आखिर यह प्रोजेक्ट कब तक पूरा होगा.

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