राजस्थान के जोधपुर में मशहूर कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की मौत को लेकर सस्पेंस गहराता जा रहा है. 28 जनवरी को हुई इस संदिग्ध मौत की असल वजह जानने के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अब अपनी जांच तेज कर दी है. रविवार सुबह एफएसएल की टीम बोरानाडा स्थित आरती नगर आश्रम पहुंची और बारीकी से सबूत जुटाए. पुलिस कमिश्नर की मौजूदगी में जांच टीम ने आश्रम के चप्पे-चप्पे की तलाशी ली है. हालांकि शुरुआती जांच में शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले हैं पर एक इंजेक्शन का निशान जरूर मिला है जिसने पूरी कहानी को संदिग्ध बना दिया है.
पिता और केयरटेकर से घंटों पूछताछ
एसआईटी प्रमुख छवि शर्मा ने साध्वी के पिता वीरमनाथ, मामा गंगाराम और केयरटेकर सुरेश से करीब तीन घंटे तक कड़े सवाल-जवाब किए हैं. केयरटेकर सुरेश ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है कि घटना वाले दिन एक नर्सिंग कर्मी ने कमरे में जाकर साध्वी को इंजेक्शन लगाया था. इंजेक्शन लगने के महज पांच मिनट बाद ही साध्वी की जोर से चीख सुनाई दी और वे कमरे के बाहर आकर गिर पड़ीं. अस्पताल ले जाते समय साध्वी की सांसें उखड़ रही थीं और उनके नाखून भी हरे पड़ रहे थे जो किसी जहर या गलत दवा के असर की ओर इशारा कर रहे हैं.
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अस्पताल जाने से पहले साध्वी के आखिरी शब्द
केयरटेकर सुरेश का दावा है कि दम तोड़ने से पहले साध्वी ने बार-बार अपने पिता से कहा था कि 'पापा मुझे न्याय दिला देना'. साध्वी के इन आखिरी शब्दों ने अब परिजनों और पुलिस के मन में कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. साध्वी के पिता वीरमनाथ ने पुलिस को अपना मोबाइल सौंप दिया है और बेटी के लिए इंसाफ की गुहार लगाई है. पुलिस अब उस कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित से पूछताछ करने की तैयारी में है जिसने मौत से ठीक पहले साध्वी को इंजेक्शन लगाया था.
क्या सीसीटीवी के साथ हुई छेड़छाड़?
मामले में एक और संदिग्ध बात यह सामने आई है कि आश्रम में कैमरों की वायरिंग तो पहले से थी लेकिन कैमरे लगे ही नहीं थे. मामा गंगाराम ने बताया कि उन्हें घटना की जानकारी काफी देर से मिली थी पर पिता और बेटी के बीच रिश्ते हमेशा अच्छे रहे हैं. फिलहाल साध्वी का विसरा जांच के लिए भेज दिया गया है जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह साफ हो पाएगी. पुलिस कंपाउंडर को नोटिस जारी कर चुकी है और इस बात की जांच कर रही है कि क्या साध्वी को कोई जानलेवा इंजेक्शन दिया गया था.