राजस्थान बीजेपी की नई प्रदेश टीम में इस बार सबसे बड़ा संदेश महिला नेतृत्व को लेकर गया है. प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ की टीम में जिन महिला नेताओं को पदाधिकारी बनाया गया है, वे सिर्फ संगठन की शो-पीस नहीं हैं, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों में महत्वपूर्ण सीटों पर मजबूत दावेदार के तौर पर उभर रही हैं.
बीजेपी के नेता लगातार युवाओं और महिलाओं को पार्टी में आगे लाने की बात कह रहे हैं. साथ ही महिलाओं को 33 फीसदी पदों पर आरक्षण देने और टिकटों में भी प्राथमिकता देने की बात करते हैं. ऐसे में इन महिलाओं की पार्टी पदाधिकारी और दूसरे मोर्चे में नियुक्ति काफी बड़ा संकेत भी अभी से विधानसभा चुनाव को लेकर देने लगी है. क्योंकि बीजेपी का सबसे बड़ा वोट बैंक इन दोनों महिलाओं को ही कहा जा रहा है. ऐसे में महिलाओं को टिकटो में भी प्राथमिकता देने के बड़े असर आगामी चुनाव में नजर आने लगे हैं, यही कारण है की पदाधिकारी की नियुक्ति के दौरान भी बीजेपी ने महिलाओं को पूरी तवज्जो दी है.
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महिला आरक्षण के बदले सियासत अब कागज से निकलकर जमीन पर दिखने लगी है. संगठन में मिली जिम्मेदारी इन नेताओं के लिए सीधा-सीधा टिकट की ओर पहला कदम मानी जा रही है.
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टिकट की दौड़ में नए चेहरे
नई टीम में जिन नामों ने सबसे ज्यादा सियासी हलचल पैदा की है, उनमें शामिल हैं—डॉ अपूर्वा सिंह, एकता अग्रवाल,राखी राठौड़, स्टेफी चौहान, अलका मूंदड़ा और सरिता गेना.
इन सभी नेताओं की खासियत यही है कि ये अलग-अलग सामाजिक और शहरी-ग्रामीण समीकरणों को साधने की क्षमता रखती हैं. संगठन मान रहा है कि महिला आरक्षण के दौर में यही चेहरे चुनावी मैदान में बीजेपी की रणनीति का मजबूत आधार बन सकते हैं.
अनुभव बनाम ऊर्जा की राजनीति
दिलचस्प बात यह है कि जहां एक ओर नई पीढ़ी की महिला नेताओं को आगे बढ़ाया गया है, वहीं अनुभव का संतुलन भी साधा गया है. प्रदेश टीम में डॉ. ज्योति मिर्धा की दोबारा एंट्री इसी रणनीति का संकेत है. पूर्व सांसद रह चुकी डॉ. मिर्धा इन सभी नेताओं से कहीं ज्यादा वरिष्ठ हैं और उनका राजनीतिक अनुभव पार्टी के लिए ट्रबल-शूटर की भूमिका निभा सकता है.
नियुक्तियां साफ संकेत हैं
मदन राठौड़ की टीम से साफ संदेश निकलता है कि आने वाले चुनावों में बीजेपी महिला नेतृत्व को फ्रंट फुट पर खेलने जा रही है. संगठन में मिली कुर्सी अब सिर्फ जिम्मेदारी नहीं, बल्कि विधानसभा टिकट की दहलीज बन चुकी है.
अब देखना दिलचस्प होगा कि इन नामों में से कौन-कौन महिला नेता संगठन से निकलकर सीधे चुनावी रणभूमि में उतरती है और किसे मिलता है टिकट का असली तोहफा. फिलहाल तो बीजेपी ने संगठन में इन महिलाओं को जगह देकर उनकी काबिलियत को तरसना शुरू कर दिया है ताकि पार्टी के बड़े चेहरे के रूप में वे मतदाताओं के सामने आ सके.
विपक्ष के सामने चिंताए
विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चिंता अभी राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर है क्योंकि अभी तक महिलाओं को भाजपा ने संगठन में ही महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी दी है राजस्थान में अभी कई राजनीतिक नियुक्तियां बाकी है और यदि इनमें भी महिलाओं को पूरी तवज्जो दी जाती है तो निश्चित तौर पर विपक्षी कांग्रेस के लिए बीजेपी की महिला ब्रिगेड से निपटा राजनीतिक रूप से जरा मुश्किल ही साबित होगा.