राजस्थान की सबसे बड़ी भर्ती परीक्षाओं में से 3 परीक्षाओं में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. महिला सुपरवाइजर से लेकर प्रयोगशाला सहायक और कृषि पर्यवेक्षक भर्ती परीक्षा तक—एक संगठित गिरोह ने OMR शीट्स से छेड़छाड़ कर नतीजों को ही बदल दिया. SOG की कार्रवाई में राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के दो अधिकारी समेत 5 आरोपी गिरफ्तार हुए हैं.
राजस्थान पुलिस के हाथ चढ़े एक महिला सहित यह वहीं पांचों आरोपी हैं जिन्होंने भर्ती परीक्षा में धांधली करते हुए अंकों में फेरबदल कर लाखों रुपए कमा लिए.
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दरअसल, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की तीन बड़ी भर्ती—महिला सुपरवाइजर सीधी भर्ती परीक्षा 2018, प्रयोगशाला सहायक भर्ती 2018 और कृषि पर्यवेक्षक भर्ती 2018 में बड़ी धांधली सामने आई है. इन परीक्षाओं में करीब 9 लाख 40 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था.
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परीक्षा परिणाम तैयार करने के लिए OMR शीट्स की स्कैनिंग और डेटा प्रोसेसिंग का काम एक निजी आउटसोर्स राघव फर्म को सौंपा गया था. जांच में खुलासा हुआ कि स्कैनिंग के बाद कंप्यूटर सिस्टम में वास्तविक डेटा से छेड़छाड़ की गई. चुनिंदा अभ्यर्थियों के अंकों को बढ़ाकर उन्हें अवैध फायदा पहुंचाया गया, जबकि योग्य उम्मीदवार पीछे रह गए. जब बोर्ड ने दोबारा स्कैनिंग कराई तो परिणामों में गंभीर विसंगतियां सामने आईं. जांच में सामने आया कि पारदर्शिता की जिम्मेदारी जिन पर थी वही लोग धांधली में शामिल निकले.
SOG की जांच में यह भी सामने आया कि चयन बोर्ड के भीतर से ही साजिश रची गई. तत्कालीन सिस्टम एनालिस्ट-कम-प्रोग्रामर और तकनीकी प्रमुख संजय माथुर ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए स्कैनिंग टीम और आउटसोर्स फर्म के कर्मचारियों से मिलीभगत की. जांच में पता चला कि OMR स्कैनिंग, डेटा छेड़छाड़ के जरिए चुनिंदा अभ्यर्थियों के अंक बढ़ाए गए और इस तरह दोबारा स्कैनिंग में फर्जीवाड़ा उजागर हुआ. संजय माथुर के पास स्कैनिंग से जुड़े सभी तकनीकी अधिकार थे और वह राजस्थान चयन बोर्ड की शिकायत जांच समिति का भी सदस्य था.
जब कर्मचारी चयन बोर्ड के ही दोनों कर्मचारियों ने धांधली शुरू कर दी तो उसके बाद नई दिल्ली में रजिस्टर्ड जी राघव कंपनी को ओएमआर शीट स्कैनिंग का ठेका दिया गया था. उसके लोग भी पेपर लीक माफिया हाउस के साथ मिलकर पैसे लेकर कई परीक्षार्थियों का नंबर बढ़वाने लगे और इस तरह 38 अभ्यर्थियों के नंबरों को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया गया है. इनमें से ज्यादातर अब सरकारी सेवा में भी आ गए. यहां तक कि दिल्ली की यह कंपनी उत्तर प्रदेश में भर्ती परीक्षा में धांधली में भी शामिल है.
एसओजी ने खुलासा किया कि इस गिरोह के उत्तर प्रदेश के एग्जाम माफियाओं से भी संबंध हैं. वैभव कंपनी के खिलाफ यूपी में पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं. कंपनी का पंजीकरण दिल्ली में है, लेकिन कामकाज यूपी से संचालित हो रहा था. इस मामले में गोमती नगर थाने में भी केस दर्ज किया गया है.
जांच के दौरान पूनम नाम की अभ्यर्थी का मामला सामने आया, जिसके अधिकतम 63 अंक बनते थे, लेकिन स्कैनिंग में 182 अंक दिखाए गए. जांच में सामने आया कि पूनम, आरोपी संजय माथुर की रिश्तेदार थी. इसी कड़ी से शक गहराया और पूरा नेटवर्क उजागर हुआ. हालांकि पूनम 1 नंबर से कटऑफ में रह गई और चयनित नहीं हो सकी.
सबसे चौंकाने वाला उदाहरण—एक अभ्यर्थी के वास्तविक माइनस 6 अंक थे, लेकिन फर्जीवाड़े से 182 अंक दिखाए गए. इसी तरह कई उम्मीदवारों के 30 से 50 अंक बढ़ाकर 185 से ज्यादा दर्शाए गए. जिसके बाद SOG ने राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के तकनीकी प्रमुख सहित 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. पूछताछ जारी है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है. दावा है कि यह केवल शुरुआत है—भर्ती सिस्टम में सेंध लगाने वालों की आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव मानी जा रही हैं.