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जयपुर के गलता पीठ में बार और केसिनो खोलने की थी तैयारी, राजस्थान हाईकोर्ट का आया बड़ा फैसला

राजस्थान हाई कोर्ट ने अवधेशाचार्य की गलता पीठ के महंत पद पर नियुक्ति को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में पीठ को उज्जैन के महाकाल मंदिर और अयोध्या के रामजन्मभूमि मंदिर की तरह विकसित करने का निर्देश दिया है।

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Court removed avdheshacharya from post of galta peeth mahant: जयपुर के गलता पीठ की संपत्ति पर बार, केसिनो और रेस्टारेंट खोलने की तैयारी थी। यहां मांसाहारी आहार भी परोसा जाता, लेकिन राजस्थान हाई कोर्ट ने सोमवार को इस पर रोक लगा दी है। दरअसल, जस्टिस समीर जैन ने स्वर्गीय रामोदराचार्य के पत्नी गायत्री देवी, पुत्र अवधेशाचार्य व सुरेश मिश्रा समेत 7 याचिकाओं को खारिज करते हुए यह आदेश दिया। बता दें इससे पहले 22 फरवरी को कोर्ट ने इस मामले में अपना ऑर्डर रिजर्व किया था।

क्या है पूरा मामला

जानकारी के अनुसार जून 1943 में रामोदराचार्य को गलता पीठ का 16वां महंत नियुक्त किया गया। उनके निधन के बाद उनके बेटे अवधेशाचार्य ने स्वयं को पीठ का महंत घोषित कर दिया। कोर्ट में पहुंचे मामले के अनुसार उन्होंने गायत्री बिल्ड एस्टेट प्रा. लि. के नाम से एक कंपनी बनाई। कोर्ट को बताया गया कि कंपनी को पीठ की संपत्ति पर गेस्ट हाउस, रेस्टारेंट, बार, केसिनो और पब चलाने का अधिकार दिया गया। इस सब के खिलाफ की कोई में याचिका दायर की गई थी। याचिका में इन सब पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

राजस्थान कोर्ट का क्या है फैसला?

सोमवार को दिए फैसला में राजस्थान हाई कोर्ट ने अवधेशाचार्य की गलता पीठ के महंत पद पर नियुक्ति को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपनी आदेश में राजस्थान सरकार को पीठ और मूर्ति व मंदिर परिसर की देखरेख का जिम्मा सौंपा है। इसके अलावा अदालत ने अपने आदेश में पीठ को उज्जैन के महाकाल मंदिर और अयोध्या के रामजन्मभूमि मंदिर की तरह विकसित करने का निर्देश दिया है।

राजस्थान हाई कोर्ट में ये सब भी हुआ

  • याचिकाकर्ताओं ने देवस्थान आयुक्त के गलता पीठ की देखरेख के लिए कमेटी बनाने के आदेश को चुनौती दी थी।
  • जयपुर शहर हिंदू विकास समिति, राज्य सरकार व अन्य याचिकाओं में अवधेशाचार्य का विरोध किया गया।
  • कोर्ट ने गलता पीठ की संपत्ति पर व्यवसायिक गतिविधियों की अनुमति को गलत ठहराया।
  • कोर्ट ने कहा कि महंत का विरासत के आधार पर चयन नहीं हो सकता।


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