राजस्थान में भजनलाल शर्मा सरकार के सत्ता में आने के दो साल पूरे हो चुके हैं. इस मौके पर सरकार जहां अपनी उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रख रही है, वहीं विपक्ष कांग्रेस सरकार की कथित विफलताओं को लेकर आक्रामक तेवर अपनाए हुए है. बीजेपी जहां विकास रथ, मंत्रियों और संगठन के जरिए सरकार के कामकाज को गांव-गांव तक पहुंचाने में जुटी है, वहीं कांग्रेस ने भी मोर्चा संभालते हुए सरकार के हर दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
कांग्रेस का आरोप आंकड़ों में उलझा रही है सरकार
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार पर विकास के हर मोर्चे पर विफल रहने का आरोप लगाया है. कांग्रेस ने गहलोत सरकार में रहे पूर्व मंत्रियों को विभागवार जवाब देने के लिए मैदान में उतार दिया है.
डोटासरा का कहना है कि “यह पर्ची की सरकार है, जिसे दिल्ली से इशारों का इंतजार रहता है. प्रशासन जनता की नहीं सुन रहा, अधिकारी फोन नहीं उठाते और मुख्यमंत्री तक पहुंच आम आदमी के लिए नामुमकिन हो गई है.
डोटासरा ने बजरी माफिया, जल जीवन मिशन, जनकल्याणकारी योजनाओं पर रोक और राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा. उनका आरोप है कि रोजाना करोड़ों की बजरी चोरी हो रही है और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की योजनाओं को जानबूझकर कमजोर किया गया. कांग्रेस का दावा है कि तमाम अंतर्विरोधों के बावजूद मुख्यमंत्री और मंत्रियों का पद पर बने रहना ही सरकार की सबसे बड़ी “उपलब्धि” है.
बीजेपी ने दी खुली बहस की चुनौती
वहीं, बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने खुली चुनौती देते हुए कहा कि बीजेपी सरकार के कामकाज पर कहीं भी, किसी भी मंच पर बहस के लिए तैयार है.
उनका कहना है कि भजनलाल सरकार ने युवाओं को रोजगार, पेपर लीक माफिया पर सख्त कार्रवाई, अपराधों में कमी, बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भरता, किसानों को दिन में बिजली और जल संकट के समाधान जैसे कई वादों को जमीन पर उतारा है.
सीएम भजनलाल ने पेश किया रिपोर्ट कार्ड , अब मंत्रियों की बारी
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पहले ही मीडिया के माध्यम से सरकार का दो साल का रिपोर्ट कार्ड पेश कर चुके हैं. सीएम का दावा है कि कांग्रेस सरकार के पांच साल की तुलना में बीजेपी ने दो साल में ज्यादा काम किया है. उन्होंने आने वाले तीन सालों के लिए बड़े विकास रोडमैप का भी ऐलान किया है. अब राजनीतिक गलियारों में नजरें मंत्रियों पर टिकी हैं कि वे अपने-अपने विभागों का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने कब रखते हैं.
मंत्रियों की रिपोर्ट कार्ड पर निर्भर करेगा मंत्रिमंडल विस्तार
वैसे मंत्रियों का यह रिपोर्ट कार्ड इसलिए भी मायने रखता है क्योंकि उनके कामकाज के आधार पर ही राजस्थान में प्रस्तावित मंत्रिमंडल फेर बदल और विस्तार का काम भी हाई कमान द्वारा पूरा किया जाएगा उम्मीदों पर खड़ा नहीं उतरने वाले कमजोर मंत्रियों की कुर्सी जा सकती है और नए चेहरों को मौका मिल सकता है.
कांग्रेस रैली के बाद गरमाएगा राजनैतिक माहौल
इधर, कांग्रेस का फोकस फिलहाल नई दिल्ली में होने वाली बड़ी रैली पर है, जिसके बाद सरकार के खिलाफ सड़क से सदन तक संघर्ष तेज करने का दावा किया जा रहा है. उधर, बीजेपी प्रचार रथों और जनसंपर्क अभियानों के जरिए सरकार की उपलब्धियां जनता तक पहुंचाने में जुटी है.
बहरहाल, दो साल बनाम पांच साल की इस सियासी बहस ने राजस्थान की राजनीति को एक बार फिर गर्मा दिया है. ऐसे में यही देखना होगा कि भजनलाल सरकार द्वारा राजस्थान के सभी 200 विधानसभा क्षेत्र में भेजे गए प्रचार रथ में रखें फीडबैक बॉक्स में जनता सरकार के रिपोर्ट कार्ड पर उपलब्धियों की कितना अंक देती है.
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