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जब अजित पवार ने बचाई थी चाचा शरद पवार की कुर्सी, खतरे में था रक्षा मंत्री का पद; राजनीति का सबसे दिलचस्प किस्सा

यह सीट अदला-बदली महाराष्ट्र की राजनीति में एक दुर्लभ मिसाल बन गई. विडंबना देखिए कि उसी बारामती की मिट्टी में बुधवार को अजित पवार का विमान हादसे में निधन हो गया.

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महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पावर के निधन से देश की राजनीति में एक खालीपन आ गया है. अजित पवार की जगह अब महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम के तौर पर उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को चुना गया है, उन्होंने भी ये प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है. अजित पवार के निधन के कुछ घंटे के भीतर ही महाराष्ट्र की राजनीति में आया इतना बड़ा बदलाव उन दिनों की याद दिलाता है जब, चाचा अजित पवार से अपने भतीजे के प्रगाढ़ रिश्ते हुआ करते थे. आज हम आपको राजनीति के उस दिलचस्प किस्से के बारे में बताने जा रहे हैं, जब अजित पवार ने अपने चाचा के लिए बड़ा त्याग किया और शरद पवार के रक्षा मंत्री पद को बचाया.

…तो रक्षा मंत्री कैसे बनते शरद पावर


दौर था 1991 का, जब देश में लोकसभा चुनावों का बिगुल बज रहा था और राजीव गांधी की हत्या ने राजनीतिक समीकरण उलट-पुलट कर दिए. कांग्रेस की जीत के बाद पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने और क्षेत्रीय दिग्गजों को मंत्रिमंडल में जगह दी. इन्हीं में शरद पावर को रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी मिली, लेकिन समस्या यह थी कि वे तब संसद के किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे. वो महाराष्ट्र विधानसभा में बारामती से विधायक तो थे, लेकिन संविधान के अनुसार छह माह के भीतर सांसद या राज्यसभा सदस्य बनना अनिवार्य था.

यह भी पढ़ें: सुनेत्रा पवार ने स्वीकार किया डिप्टी सीएम का प्रस्ताव, कल NCP विधायक दल की बैठक में लगेगी मुहर

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चाचा के लिए अजित ने छोड़ दी सीट


यहीं से शुरू होता है अजित पावर का वह बलिदान, जिसने चाचा की कुर्सी पर आए खतरे को टाल दिया. शरद पावर उस समय महाराष्ट्र की राजनीति के स्तंभ थे, जबकि उनके भतीजे अजित पहली ही कोशिश में बारामती से लोकसभा पहुंच चुके थे. संकट गहरा गया तो अजित ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी संसदीय सीट छोड़ दी. इसके जवाब में शरद पावर ने विधायकी त्याग दी. नवंबर 1991 में बारामती में दो उपचुनाव हुए, एक लोकसभा के लिए और दूसरा विधानसभा के लिए. नतीजा वही हुआ जैसा सोचा गया था.

बारामती में ही ली आखिरी सांस


शरद पावर भतीजे की सीट पर सांसद बन दिल्ली चले गए, जबकि अजित चाचा की छोड़ी विधायकी जीतकर मुंबई विधानसभा में कदम रखा. महज 32 साल की उम्र में यह निर्णय न सिर्फ पारिवारिक निष्ठा का प्रतीक था, बल्कि राजनीतिक दूरदर्शिता का भी. अजित को तत्काल महाराष्ट्र सरकार में राज्य मंत्री बना दिया गया, जिससे उनका सफर पंख पसारने लगा. यह सीट अदला-बदली महाराष्ट्र की राजनीति में एक दुर्लभ मिसाल बन गई. विडंबना देखिए कि उसी बारामती की मिट्टी में बुधवार को अजित पवार का विमान हादसे में निधन हो गया.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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