हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: Asian Games 2026election commissionBigg Boss 20

स्कूलों को क्यों चाहिए अल्पसंख्यक दर्जा? महाराष्ट्र में 75 शिक्षण संस्थानों की फाइलों पर धड़ाधड़ हुए साइन

महाराष्ट्र अल्पसंख्यक विकास विभाग में उप सचिव मिलिंद शेनॉय ने उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के विमान दुर्घटना में निधन के दिन कुछ घंटों में 75 स्कूलों को अल्पसंख्यक दर्जा दे दिया था. सरकार ने शेनॉय का तबादला कर मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. जानें स्कूलों को क्यों चाहिए अल्पसंख्यक दर्जा?

विज्ञापन

महाराष्ट्र अल्पसंख्यक विकास विभाग के अधिकारी मिलिंद शेनॉय द्वारा नियमों को ताक पर रखकर करीब 75 स्कूलों को अल्पसंख्यक दर्जा देने का मामला अब तूल पकड़ चुका है. अल्पसंख्यक दर्जे की फाइलों को मंजूरी देने की प्रक्रिया पिछले साल अगस्त से रुकी हुई थी, लेकिन 28 जनवरी 2025 को जिस दिन उपमुख्यमंत्री अजीत पवार का निधन हुआ, उसी दिन मिलिंद शेनॉय ने धड़ाधड़ 75 फाइलों पर हस्ताक्षर कर उन्हें अल्पसंख्यक दर्जा प्रदान कर दिया. इस घटनाक्रम के बाद सरकार ने न केवल शेनॉय का तबादला कर दिया है, बल्कि उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने भी मामले की गहन जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.

यह भी पढ़ें: अजित पवार के प्लेन क्रैश के दिन 75 फाइलें कैसे हुई मंजूर? अल्पसंख्यक विभाग के उप सचिव पर गिरी गाज

स्कूलों के लिए क्यों जरूरी है ‘अल्पसंख्यक दर्जा’?

शिक्षा क्षेत्र में अल्पसंख्यक दर्जा मिलना किसी भी स्कूल के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है. संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत अल्पसंख्यक समुदायों को अपनी शैक्षणिक संस्थाएं स्थापित करने और संचालित करने का मौलिक अधिकार है. यह दर्जा मिलने पर कुछ महत्वपूर्ण कानूनों से छूट मिलती है, जो इन संस्थाओं को अपनी विशेष पहचान और प्रशासन बनाए रखने में मदद करती है.

विज्ञापन

अल्पसंख्यक विद्यालयों पर लागू नहीं होने वाले प्रमुख कानून

  • आरटीई अधिनियम: सामान्य निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25% सीटें आरक्षित करनी अनिवार्य हैं, लेकिन अल्पसंख्यक स्कूलों पर यह लागू नहीं होता. सुप्रीम कोर्ट के 2014 के फैसले में स्पष्ट किया गया कि RTE अधिनियम अल्पसंख्यक संस्थानों पर लागू नहीं होता.
  • टीईटी: शिक्षकों की नियुक्ति के लिए TET अनिवार्य है, लेकिन अल्पसंख्यक स्कूलों में यह अनिवार्य नहीं माना जाता, क्योंकि वे अपनी शिक्षक भर्ती की नीति खुद तय कर सकते हैं.
  • सूचना का अधिकार अधिनियम: अल्पसंख्यक संस्थानों पर RTI पूरी तरह लागू नहीं होता, जिससे वे कुछ मामलों में जानकारी देने से मुक्त रहते हैं.

ये छूटें अल्पसंख्यक स्कूलों को सरकारी हस्तक्षेप से बचाती हैं, साथ ही अनुदान, दान और अन्य लाभ भी मिलते हैं.

जांच के घेरे में ‘सर्टिफिकेट’ का वितरण

इस पूरे मामले में सबसे विवादित पहलू इसकी टाइमिंग है. पिछले कई महीनों से लंबित फाइलों को अचानक एक ही दिन में निपटाना संदेह पैदा करता है. आरोपों के मुताबिक, नियमों की अनदेखी कर ये सर्टिफिकेट बांटे गए हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि क्या इन स्कूलों को दर्जा देने के पीछे कोई आर्थिक अनियमितता या राजनीतिक दबाव था. फिलहाल, इस कार्रवाई के मुख्य सूत्रधार माने जा रहे मिलिंद शेनॉय का तबादला कर दिया गया है.

विज्ञापन

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola