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AI बना नकल का ‘सुपर टीचर’! 12वीं के पेपर में ChatGPT से हल, महाराष्ट्र के चामोर्शी में हड़कंप

महाराष्ट्र के गड़चिरोली जिले में 12वीं के पेपर में नकल के लिए 'ChatGPT' का सहारा लिया गया. बाहर बैठे 'डिजिटल मास्टर' ने AI से उत्तर निकाले और अंदर प्रिंटआउट भेज दिए. मामले का खुलासा होते ही चामोर्शी में केंद्र प्रमुख समेत 4 सस्पेंड.

Image Credit: Google Gemini AI

पढ़ाई के बजाय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा… और परीक्षा हॉल के बाहर बैठा ‘डिजिटल मास्टर’! महाराष्ट्र के गड़चिरोली जिले के चामोर्शी में 12वीं के राज्यशास्त्र पेपर के दौरान जो खुलासा हुआ, उसने शिक्षा व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया. चामोर्शी में 12वीं बोर्ड की परीक्षा के दौरान छात्रों को पास कराने के लिए किताबों या गाइड का नहीं, बल्कि सीधे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) यानी ChatGPT का सहारा लिया गया.
जिले के चामोर्शी स्थित जा. कृ. बोमनवार कनिष्ठ विज्ञान व कला महाविद्यालय परीक्षा केंद्र पर सवालों की फोटो बाहर भेजी गईं, और उनके जवाब ChatGPT से खोजे गए. इतना ही नहीं, उन जवाबों के प्रिंटआउट तैयार कर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने की भी कोशिश हुई. यानी न किताब, न गाइड, सीधा AI से “रेडीमेड” उत्तर!

औचक निरीक्षण में खुली पोल

18 फरवरी को जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुहास गाड़े अचानक निरीक्षण के लिए पहुंचे. केंद्र के बाहर संदिग्ध हलचल देखी गई. जांच में माइक्रो नोट्स के साथ-साथ चल रहे प्रश्नपत्र के सवालों के ChatGPT से निकाले गए प्रिंटआउट बरामद हुए. सूत्रों के अनुसार, प्रश्नपत्र का फोटो मोबाइल से बाहर भेजा गया था. बाहर बैठे सहयोगियों ने AI की मदद से उत्तर तैयार किए और उन्हें प्रिंट कर अंदर पहुंचाने की योजना बनाई. लेकिन इससे पहले कि यह ‘डिजिटल नकल ऑपरेशन’ सफल होता, पूरा खेल उजागर हो गया.

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चार पर गिरी गाज

मामले को गंभीर मानते हुए जांच समिति गठित की गई. रिपोर्ट में सामूहिक नकल की पुष्टि होने के बाद प्रभारी गटशिक्षणाधिकारी सुधीर आखाडे की शिकायत पर चामोर्शी पुलिस थाने में केंद्र प्रमुख समेत तीन शिक्षक और एक शिपाई के खिलाफ मामला दर्ज किया गया. शिक्षा विभाग ने चारों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.

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बड़ा सवाल: मददगार या हथियार?

AI तकनीक जहां छात्रों के लिए सीखने का सशक्त माध्यम बन सकती है, वहीं उसका दुरुपयोग शिक्षा की नींव हिला सकता है. चामोर्शी की यह घटना बताती है कि अब नकल की ‘चिट्ठी’ डिजिटल हो चुकी है. अब सवाल यह है—क्या परीक्षा प्रणाली तकनीक की इस नई चुनौती के लिए तैयार है? क्योंकि अगर पढ़ाई कम और AI पर भरोसा ज्यादा होगा, तो मेहनत का महत्व कहीं पीछे न छूट जाए.


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