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महाराष्ट्र में नगर निगम चुनाव से पहले लाडली बहनों को नहीं मिलेगी जनवरी की एडवांस किस्त, चुनाव आयोग ने लगाई रोक

महाराष्ट्र में 29 नगर निगम चुनावों की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और ठीक मतदान से 72 घंटे पहले एक बड़ा फैसला सामने आया है. विपक्ष की शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन (मेरी लाडली बहन) योजना की जनवरी की एडवांस किस्त पर रोक लगा दी है. यानी लाभार्थी महिलाओं के खाते में फिलहाल जनवरी के पैसे नहीं जाएंगे.

महाराष्ट्र में 29 नगर निगम चुनावों की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और ठीक मतदान से 72 घंटे पहले एक बड़ा फैसला सामने आया है. विपक्ष की शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन (मेरी लाडली बहन) योजना की जनवरी की एडवांस किस्त पर रोक लगा दी है. यानी लाभार्थी महिलाओं के खाते में फिलहाल जनवरी के पैसे नहीं जाएंगे.

हालांकि दिसंबर की किश्त डाली जा सकती है. खबर है कि आज से ही लाडली बहन के दिसंबर की किश्त आने लगी है, बीजेपी ने विपक्ष पर आरोप लगाया है कि इनकी मानसिकता महिला विरोधी है.

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इस योजना की इस समय कुल 2.3 करोड़ महिला लाभार्थी हैं. विधानसभा चुनाव में यही योजना बीजेपी और महायुति के लिए मास्टरस्ट्रोक साबित हुई थी और आरोप है कि निकाय चुनावों में भी बीजेपी इसी फार्मूले को दोहराना चाहती थी और चुनाव से ठीक पहले सरकार दो किश्त यानि जनवरी की भी किश्त लाभार्थी महिलाओं के खाते में डालना चाहती थी. विपक्ष ने इसे मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन बताया और EC ने जनवरी की रकम पर रोक लगा दी. कांग्रेस का कहना है कि हमारा विरोध योजना को लेकर नहीं है, हम सिर्फ महिलाओं को झूठ बोलकर बरगलाने वालों से सावधान करना चाहते हैं.

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लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती है. चुनाव से पहले सरकार के पास 36 घंटे बचे है, अगर महायुति सरकार लाभार्थियों के खाते में दिसंबर और जनवरी की किस्त एक साथ डाल देती तो भी चुनावी गणित बदल सकता था, लेकिन खबर है कि सरकार ने दिसंबर की किश्त लाभार्थियों के खाते में डालना शुरू कर दिया है अब इसका कितना असर होगा इस पर संशय बरकरार है.

महाराष्ट्र में 29 महा नगरपालिका के लिए 15 जनवरी को वोटिंग है और महाराष्ट्र की सियासत फिलहाल योजना बनाम रोक की तकरार में फंसी है. तो क्या महिला वोटर्स तक सीधा पैसा भेजकर चुनावी बढ़त बनाने की रणनीति विफल हो जाएगी?
या सरकार आखिरी घंटे में दिसंबर की किस्त डालकर बाजी मार लेगी? इस योजना को लेकर महाराष्ट्र में पहले भी काफी विवाद हो चुका है क्योंकि बड़े पैमाने पर इसमें अपात्र लोग थे जिन्हें स्कूटनी के बाद निकाला गया.


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