Sonam Raghuvanshi latest update: राजा रघुवंशी हत्याकांड केस में मेघालय पुलिस ने दावा किया था कि सोनम रघुवंशी समेत 5 आरोपी अपना गुनाह कबूल चुके हैं। मामले में उस समय नया मोड़ आ गया, जब हत्या के आरोप में गिरफ्तार दो आरोपियों आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी ने अदालत में अपने पूर्व कबूलनामे से मुकरते हुए मजिस्ट्रेट के सामने चुप्पी साध ली। हालांकि पुलिस का कहना है कि उनके पास आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त भौतिक साक्ष्य हैं, जिनके आधार पर एक मजबूत मामला तैयार किया जा रहा है। पुलिस ने इस केस में अब इंदौर से तीन और आरोपियों लोकेंद्र सिंह तोमर, सिलोम जेम्स और बल्लू अहिरवार को गिरफ्तार किया है। इन तीनों पर सबूत मिटाने का आरोप है।
क्या है मेघालय का हनीमून केस
इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी अपनी पत्नी सोनम के साथ 20 मई को हनीमून के लिए मेघालय आए थे। 23 मई को कपल लापता हो गया और 2 जून को राजा रघुवंशी का शव एक गहरी खाई में क्षत-विक्षत अवस्था में मिला। पुलिस जांच में सामने आया कि इस जघन्य अपराध की साजिश राजा की पत्नी सोनम और उसके प्रेमी राज कुशवाहा ने मिलकर रची थी। आरोप है कि सोनम ने अपने पति की हत्या के लिए 20 लाख रुपये की सुपारी दी थी। साजिश में शामिल विशाल सिंह चौहान, आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी ने सोनम की मौजूदगी में राजा को चाकुओं से गोदा और शव को खाई में फेंक दिया।
कबूल नामे से मुकरे दो आरोपी
पुलिस ने दावा किया था कि प्रारंभिक पूछताछ में आकाश और आनंद ने अपनी भूमिका स्वीकार की थी, लेकिन 26 जून को जब उन्हें मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया गया, तो दोनों ने कोई बयान देने से इनकार कर दिया। पुलिस के अनुसार, मजिस्ट्रेट के समक्ष दिया गया बयान ही कानूनी रूप से स्वीकार्य होता है। पुलिस अब FSL (फोरेंसिक साइंस लैब) की रिपोर्ट और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ केस मजबूत कर रही है।
मामले में अब तक 8 आरोपी गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें सोनम और राज के अलावा तीन सुपारी किलर्स और तीन सबूत मिटाने के आरोपी शामिल हैं। पुलिस ने इंदौर में कई स्थानों पर छापे मारे और एक देसी पिस्तौल, दो मैगजीन और जिंदा कारतूस बरामद किए। पुलिस अब DNA रिपोर्ट, कॉल रिकॉर्ड, GPS डेटा और अन्य तकनीकी प्रमाणों के आधार पर चार्जशीट तैयार कर रही है, जिसे जल्द ही अदालत में पेश किया जाएगा। राजा रघुवंशी के परिजनों ने सोनम और राज पर नार्को टेस्ट की मांग की थी, लेकिन मेघालय पुलिस ने इसे अस्वीकार कर दिया। पुलिस अधीक्षक विवेक सियेम ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार नार्को टेस्ट अनिवार्य नहीं है और जब पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हों, तब इसकी आवश्यकता नहीं होती।
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