Shimla News: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित कोल जल बांध के जलाशय में फंसे 10 लोगों को छह घंटे से ज्यादा समय तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित निकाला गया है। अधिकारियों के अनुसार, फंसे हुए लोगों में वन विभाग के कर्मचारी और स्थानीय लोग शामिल थे। सामने आया है कि वन विभाग की टीम उन पेड़ों और लकड़ियों का जायजा लेने गई थी जो बाढ़ के कारण जलाशय तक पहुंच गए थे। टीम ने अपनी सहायता के लिए स्थानीय लोगों को भी साथ लिया था।
बांध में आ गया है भारी मलबा
मंडी जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि मोटर बोट में खराबी के बाद वे 20 अगस्त की शाम को जलाशय में फंस गए। नाव चलने में असमर्थ थी, क्योंकि जलाशय में हद से ज्यादा मलबा था। इसमें बड़ी लकड़ियां और पेड़ों की शाखाएं भी शामिल थीं। ये सारा मलबा बाढ़ के साथ बहकर यहां पहुंचा है।
फंसे लोगों ने प्रशासन को किया फोन
अधिकारी ने कहा कि चूंकि नाव ने काम करना बंद कर दिया और मलबे के कारण वह आगे नहीं बढ़ रही थी, इसलिए फंसे हुए लोगों ने शाम करीब 6 बजे स्थानीय प्रशासन को फोन किया। इसके बाद राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की एक टीम को मौके पर भेजा गया।"
मंडी और बिलानपुर की सीमा पर है ये बांध
रविवार देर रात एनडीआरएफ टीम के साथ-साथ मंडी के उपायुक्त अरिंदम चौधरी समेत स्थानीय अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। फंसे हुए लोगों को बचाने में एनडीआरएफ टीम के सदस्यों को करीब छह घंटे लगे, क्योंकि ऑपरेशन रात से लेकर सोमवार तक चला। बताया गया है कि सतलुज नदी पर एनटीपीसी की ओर से निर्मित 800 मेगावाट का कोल बांध हिमाचल के मंडी और बिलासपुर जिलों की सीमा पर है।
हिमाचल के ये हैं हालात
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में 24 जून से अचानक बाढ़ और भूस्खलन समेत बारिश से संबंधित घटनाओं में 341 लोगों की मौत हो गई है। 327 लोग घायल हो गए हैं। जून के आखिरी सप्ताह में मानसून की शुरुआत के बाद से राज्य में 115 भूस्खलन और 60 अचानक बाढ़ देखी गई है। हिमाचल को कुल 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के नुकसान का अनुमान है।
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