गुजरात के अहमदाबाद शहर को देश–विदेश में पहचान दिलाने वाले साबरमती रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट पर अब तक 2378 करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम खर्च हो चुका है, जबकि इसके मुकाबले मात्र 131 करोड़ रुपये की ही आय दर्ज की गई है। यह जानकारी नगर निगम की सामान्य सभा में चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता द्वारा दी गई।
विपक्ष नेता शहजादखान पठाण ने आरोप लगाया कि बीजेपी शासन में यह दावा किया गया कि रिवरफ्रंट पर गगनचुंबी इमारतें बनेंगी और अहमदाबाद को सिंगापुर जैसा शहर बनाया जाएगा। लेकिन हकीकत यह है कि अब तक ऐसे कोई ठोस परिणाम देखने को नहीं मिले हैं। जबकि रिवरफ्रंट परियोजना शुरू होने के बाद से लगातार घाटे का सौदा साबित हो रही है। नगर निगम खुद विभिन्न स्रोतों से कर्ज लेकर रिवरफ्रंट को लोन दे रहा है। उनके मुताबिक अब तक इस परियोजना पर 2378.94 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जबकि अलग–अलग माध्यमों से केवल 131 करोड़ रुपये की आय हुई है।
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पठाण ने यह भी कहा कि हैरानी की बात यह है कि 2008–09 से अब तक रिवरफ्रंट पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों और बाउंसरों को 71 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है, जो कुल आय का बड़ा हिस्सा है। इसके अलावा नगर निगम से 2081.31 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया है।
कर्ज देते समय यह दावा किया गया था कि रिवरफ्रंट पर रीक्लेम की गई जमीन को बेचकर नगर निगम का कर्ज चुका दिया जाएगा। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि बिक्री योग्य जमीन उपलब्ध होने के बावजूद नगर निगम सत्ताधीशों की नीतियों के कारण अब तक प्लॉट नहीं बिक पा रहे हैं। विपक्ष ने इस पूरे मामले को गंभीर वित्तीय कुप्रबंधन बताते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है।
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