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मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुलाई पार्टी महासचिवों की बैठक, राहुल गांधी भी रहेंगे मौजूद, इन मुद्दों पर होगी चर्चा

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के ऑफिस बीयरर्स की मीटिंग 18 मार्च को दिल्ली में बुलाई है। इस बैठक में संगठन से जुड़े हरेक पहलू पर विचार किया जाएगा।

Mallikarjun Kharge
रमन झा, नई दिल्ली। इस साल बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं वहीं अगले साल यानी 2026 में पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस ने अभी से ही तैयारी शुरू कर दी है। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक बैठक बुलाई है। इस बैठक का आयोजन राजधानी दिल्ली में मंगलवार (18 मार्च) को होने वाला है। खड़गे की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में महासचिवों और ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के ऑफिस बीयरर्स को बुलाया गया है। इस बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी मौजूद रहेंगे।

जिला से बूथ लेवल तक पार्टी को मजबूत करने पर फोकस

सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में पार्टी को जिला से लेकर बूथ लेवल तक मजबूत करने पर फोकस रहेगा। इससे पहले ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की बैठक पिछले साल दिसंबर महीने में हुई थी। बेलगावी में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में तय हुआ था कि 2025 में संगठन की मजबूती पर फोकस रहेगा और उसके उपाय पर विचार किया जाएगा।

किसानों की समस्याएं उठाने पर होगी चर्चा

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस पार्टी की हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली में हुई करारी हार के बाद संगठन को दुरुस्त करने की ज्यादा जरूरत को महसूस किया जा रहा है। मीटिंग में किसानों की समस्याओं को जोरशोर से उठाने पर चर्चा की जाएगी। साथ हीं ट्रंप प्रशासन की मोदी सरकार से टैरिफ मुद्दे पर बातचीत को गंभीरता से लेने की बात पर भी चर्चा हो सकती है। साथ हीं परिसीमन और कुछ राज्यों में इलेक्टोरल रोल (निर्वाचक नामावली) में आई गड़बड़ियों पर भी विचार किया जाएगा।

'संगठन को मजबूत करने के लिए युद्ध स्तर पर काम करना होगा'

वहीं, कुछ पार्टी नेताओं को ऐसा लगता है कि कांग्रेस की लगातार हार ने इस बात को भी साफ कर दिया है कि बीजेपी की संगठनात्मक शक्ति का सामना करने के लिए विपक्षी पार्टी के तौर पर कांग्रेस को युद्ध स्तर पर संगठनात्मक पुनर्निर्माण पर काम करना होगा। एक राय ये भी है कि लोकसभा चुनाव से पहले दो भारत जोड़ो यात्राओं में राहुल गांधी की रीब्रांडिंग पर ध्यान केंद्रित किया गया था, लेकिन नेतृत्व संगठनात्मक लामबंदी और मजबूती के लिए उन यात्राओं का समानांतर उपयोग करने में प्रभावी नहीं रहा। ऐसे में 18 तारीख की मीटिंग अपने आप में काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है ।


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