लोकसभा चुनाव ज्यादा दिन दूर नहीं बचे हैं और इसी बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एनडीए में लौटने की अटकलें लगने लगी हैं। इसके पीछे की वजह जदयू में उठे आंतरिक मतभेदों को बताया जा रहा है। इसे लेकर गुरुवार को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक भी हुई थी। पार्टी अध्यक्ष ललन सिंह से उनकी अनबन की खबरें भी आई हैं।
फिलहाल नीतीश कुमार कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A के साथ हैं। लेकिन इस साल पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद उनका रुख कुछ खास सकारात्मक नहीं दिखा है। इन्हीं सब बातों को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि नीतीश कुमार एक बार फिर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल हो सकते हैं।
उपेंद्र कुशवाहा ने कही पैरवी करने की बात
इस कयास को हवा दी राष्ट्रीय लोक जनता दल के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने। एक समय में नीतीश के करीबी रहे कुशवाहा ने मंगलवार को कहा था कि अगर नीतीश कुमार के एनडीए में जाने पर फैसला भाजपा के लोग करेंगे लेकिन हम उनके लिए पैरवी करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा था कि नीतीश कुमार पहले भी भाजपा के साथ गठबंधन कर चुके हैं।
नीतीश नेता हैं, जदयू एकजुट है: ललन सिंह
अफवाह चल रही थी कि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह नीतीश के साथ अनबन के चलते इस पद से इस्तीफा दे सकते हैं। लेकिन अब उन्होंने तस्वीर साफ करते हुए कहा है कि नीतीश कुमार हमारी पार्टी के नेता हैं। जदयू एकजुट है और ऐसी ही रहेगी। नीतीश कुमार या खुद के भाजपा में जाने के कयासों को उन्होंने कोरी अफवाह बताया है।
नीतीश को लेकर क्या बोले प्रशांत किशोर
राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर उर्फ पीके का कहना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले अब नीतीश के पास कोई विकल्प नहीं बचा है। हो सकता है कि वह पाला बदलने वाले हों लेकिन उसके पास दूसरा पाला तो होना चाहिए। आज की तारीख में उन्हें कोई स्वीकार करने वाला नहीं है। नीतीश कुमार को पता ही नहीं है कि वह कहां हैं और कहां होंगे।
'विपक्षी गठबंधन में नीतीश की पूछ नहीं'
भाजपा नेता और केंद्रीय गृह मंत्री नित्यानंद राय कह चुके हैं कि विपक्षी गठबंधन में नीतीश कुमार की बिल्कुल पूछ नहीं है। हालांकि, नीतीश की एनडीए में वापसी को लेकर उन्होंने कुछ स्पष्ट नहीं कहा। केंद्रीय मंत्री ने बस इतना कहा कि नीतीश कुमार विपक्ष के गठबंधन से निराश लग रहे हैं और उसमें शामिल होने का फैसला भी उन्होंने खुद ही किया था।