Bihar Caste Survey: बिहार में जातीय सर्वे के नतीजे सामने आने के बाद विपक्षी पार्टियां इसके आंकड़ों पर लगातार सवाल खड़े कर रही हैं। सर्वे को लेकर राष्ट्रीय लोक जनता दल (Rashtriya Lok Janata Dal) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा लगातार हमला बोल रहे हैं। कुशवाहा ने कहा- ''हम इस फर्जी डेटा के खिलाफ आवाज उठाएंगे। हमने फैसला किया है कि 11 अक्टूबर को हर जिले में विरोध प्रदर्शन करेंगे।'' 14 अक्टूबर को हम पटना में 'राजभवन' मार्च का आयोजन करेंगे। हमें लगता है कि सरकार ने आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए जल्दबाजी में डेटा जारी किया है। ध्यान केवल चुनाव और राजनीतिक लाभ पर था। ऐसे में लोगों को फायदा नहीं होगा। डेटा पूरी तरह ग़लत और फर्जी है।"
'पासवान समाज के साथ धोखा'
वहीं जाति अधारित सर्वे को लेकर केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस ने कहा कि हमारे पासवान समाज के साथ धोखा किया गया है। अधिकारियों ने जांच के नाम पर हमारे जाति के लोगों को कम दिखाया है। सत्ताधारी दल के दबाव में हमारे जाति को कम दिखाया गया है क्योंकि मेरी जाति एनडीए को वोट देती है।
भाजपा का सूपड़ा साफ हो जाएगा
बिहार में जाति आधारित सर्वे के बाद मंत्री तेज प्रताप यादव ने कहा कि जो राज्य सर्वे कराना चाहते हैं, यह उनकी इच्छा पर निर्भर करता है। आने वाले चुनाव में भाजपा का जाना तय है। भाजपा का सूपड़ा साफ हो जाएगा। बता दें कि बिहार के बाद राजस्थान ने भी जातिगत आधारित सर्वे कराने का फैसला लिया है। इसके लिए आदेश जारी किए जा चुके हैं।
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जाति आधारित गणना की रिपोर्ट के अनुसार बिहार में 81.99% हिंदू और 17.70% मुस्लिम हैं। इसमें अति पिछड़ा वर्ग 36.01%, पिछड़ा वर्ग 27.12%, अनुसूचित जाति 19.65%, सामान्य 15.1% और अनुसूचित जनजाति 1.68 प्रतिशत है। बिहार में यादव जाति की संख्या 14.26% है। यादव और मुस्लिमों को मिलाकर बिहार की 32% जनसंख्या है। इससे पहले उपेंद्र कुशवाहा ने दावा किया था कि उनकी जातीय-आर्थिक सर्वेक्षण के क्रम में गणना नहीं हुई है।