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गिल की खराब कप्तानी, गेंदबाजों ने दिल खोलकर लुटाए रन, इंदौर में भी टीम इंडिया ने दोहराई वही पुरानी गलती!

IND vs NZ 3rd ODI: इंदौर में खेले जा रहे तीसरे वनडे मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने 8 विकेट खोकर स्कोर बोर्ड पर 337 रन लगाए हैं. टीम इंडिया ने एक बार फिर अपनी पुरानी गलती दोहराई और भारतीय गेंदबाज तीसरे वनडे में बेबस नजर आए.

IND vs NZ 3rd ODI

IND vs NZ 3rd ODI: वडोदरा फिर राजकोट और अब इंदौर. लगातार तीन मैचों में एक कमजोरी से टीम इंडिया पीछा नहीं छुड़ा सकी. सीरीज के तीसरे वनडे मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने 8 विकेट खोकर स्कोर बोर्ड पर 337 रन लगा डाले हैं. 5 रनों के स्कोर पर दो विकेट गंवाकर मुश्किल में दिख रही कीवी टीम को एक बार फिर भारतीय गेंदबाजों ने वापसी करने का पूरा मौका दिया. शुभमन गिल की कप्तानी बेहद साधारण नजर आई, तो गेंदबाजों ने दिल खोलकर रन लुटाए.

टीम इंडिया ने फिर दोहराई पुरानी गलती

टॉस जीतने के बाद कप्तान शुभमन गिल ने न्यूजीलैंड को बैटिंग करने के लिए कहा. पहले ही ओवर में अर्शदीप सिंह ने हेनरी निकोल्स को पवेलियन की राह दिखा दी. वहीं, अगले ओवर में हर्षित राणा ने डेवोन कॉनवे को चलता कर दिया. 58 रनों तक पहुंचते-पहुंचते कीवी टीम ने विल यंग का भी विकेट गंवा दिया. न्यूजीलैंड पूरी तरह दबाव में थी और भारतीय टीम ने मैच में शिकंजा कस लिया था. हालांकि, इसके बाद इंडियन बॉलर्स को चौथा विकेट 219 रनों के बाद नसीब हुआ.

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बीच के ओवर्स में विकेट ना निकल पाने की कमजोरी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई. डेरिल मिचेल और ग्लेन फिलिप्स के आगे भारतीय बॉलर्स ने पूरी तरह से मानो सरेंडर कर दिया. वडोदरा और राजकोट में यही गलती करने के बावजूद इंदौर में टीम इंडिया के गेंदबाज तैयारी के साथ मैदान पर नहीं उतरे.

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कप्तान शुभमन गिल एक साझेदारी को तोड़ने का प्लान 31 ओवर तक नहीं खोज सके. विकेट तो हाथ लगा नहीं इसके साथ ही भारतीय गेंदबाज रनों पर भी लगाम लगाने में नाकाम रहे. अर्शदीप ने 10 ओवर में 63 रन लुटाए, तो हर्षित ने 84 रन खर्च कर डाले. कुलदीप यादव ने महज 6 ओवर का स्पेल डाला, जिसमें वह 48 रन दे बैठे. रविंद्र जडेजा को मैच में अपना पहला ओवर डालने के लिए 29 ओवर तक इंतजार करना पड़ा.

वर्ल्ड कप से पहले बढ़ गई हैं टेंशन

मिडिल ओवर्स के अंदर विकेट ना चटका पाने की यह कमजोरी टीम इंडिया के लिए जी का जंजाल बन सकती है. भारतीय गेंदबाजों और खासतौर पर स्पिनर्स का यह हाल अपनी सरजमीं पर ऐसा हो रहा है, तो विदेशी धरती पर इन बॉलर्स के साथ टीम इंडिया कैसे जीत पाएगी यह बड़ा सवाल है. अगले साल यानी 2027 में टीम इंडिया को वर्ल्ड कप खेलना है और उससे पहले इस कमजोरी कड़ी का समाधान जल्द से जल्द खोजना होगा.


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