PCB May Enforce 'Force Majeure' with ICC: पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड 15 फरवरी 2026 को कोलंबो में भारत के खिलाफ होने वाले अपने तय टी20 वर्ल्ड कप मैच से हटने के बाद आईसीसी से संभावित कार्रवाई से बचने के लिए 'फोर्स मेज्योर' क्लॉज का इस्तेमाल करने पर विचार कर रहा है. 'इंडियन एक्सप्रेस' के सूत्रों के मुताबिक, पीसीबी को आखिरी वक्त में मैच से हटने के लिए आईसीसी से डिसिप्लिनरी एक्शन की उम्मीद है और उसका मानना है कि 'फोर्स मेज्योर' ही उसके पास इकलौता कानूनी विकल्प है.
फोर्स मेज्योर क्या है?
'फोर्स मेज्योर' का मतलब ऐसी असाधारण और अप्रत्याशित हालात हैं जो कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों को पूरा करने से रोकती हैं. आईसीसी को भेजे गए अपने कम्युनिकेशन में, पीसीबी से उम्मीद है कि वो 1 फरवरी को पाकिस्तान सरकार की तरफ जारी किए गए एक सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देगा, जिसमें बोर्ड को भारत के खिलाफ मैच का बायकॉट करने का निर्देश दिया गया था. पीसीबी अधिकारियों का तर्क है कि सरकार के दखल से हालात उनके काबू से बाहर हो गए, जिससे मैच से हटने के अलावा कोई चारा न रहा.
---विज्ञापन---
यह भी पढ़ें- किस पाकिस्तानी खिलाड़ी के नाम में ‘सैयद’ और ‘किरमानी’ दोनों शब्द आते हैं? 99% क्रिकेट फैंस के पास नहीं होगा जवाब!
---विज्ञापन---
'इस तर्क में दम नहीं'
हालांकि आईसीसी के अंदरूनी सूत्रों और बीसीसीआई के अधिकारियों का मानना है कि इस तर्क में दम नहीं है. इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने पहले ही पीसीबी को संभावित अंजाम के बारे में चेतावनी दी है, हालांकि कोई खास तरह के बैन का ऐलान नहीं किया गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक पीसीबी को भारी वित्तीय जुर्माना लग सकता है, खासकर इसलिए क्योंकि भारत-पाकिस्तान मैच दुनिया के क्रिकेट में सबसे व्यावसायिक तौर पर सबसे वैल्युएबल मैचों में से एक है. इसके अलावा आईसीसी पाकिस्तान को बाइलेट्रल सीरीज़ से बैन करने पर भी विचार कर सकता है, जिससे इंटरनेशनल लेवल पर वो अलग थलग पड़ सकता है.
क्या ऐसे हालात में मिली है सजा?
ऐतिहासिक तौर पर ऐसे हालात में पहले सजा नहीं मिली है. वर्ल्ड कप 1996 के दौरान, ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज ने सुरक्षा चिंताओं के कारण श्रीलंका का दौरा करने से इनकार कर दिया था, लेकिन उन पर कोई बैन नहीं लगा. वर्ल्ड कप 2003 में इंग्लैंड ने सरकार की सलाह के बाद जिम्बाब्वे जाने से इनकार कर दिया था, जबकि न्यूज़ीलैंड ने सुरक्षा जोखिमों का हवाला देते हुए नैरोबी जाने से परहेज किया था, इन दोनों मामलों में आईसीसी ने मैच के पूरे प्वॉइंट्स विपक्षी टीम को दे दिए थे. 2009 में टी-20 वर्ल्ड कप के लिए ज़िम्बाब्वे के खिलाड़ियों को वीजा देने से इनकार करने के बाद भी इंग्लैंड पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी.
पाकिस्तान का मामला अलग क्यों है?
इन मिसालों के बावजूद ये मामला अलग है क्योंकि पाकिस्तान सुरक्षा या वेन्यू से संबंधित चिंताओं का हवाला दिए बिना मैच खेलने से इनकार कर रहा है. चूंकि कोलंबो एक न्यूट्रल वेन्यू है और पाकिस्तान पहले ही श्रीलंका में अपने मैच खेलने के लिए सहमत हो गया था, इसलिए ICC सवाल कर सकता है कि सिर्फ भारत के खिलाफ मैच का बायकॉट क्यों किया गया. ये भी देखने को मिला है कि जिस दिन सरकार ने बायकॉट का निर्देश जारी किया था, उसी दिन पाकिस्तान की अंडर-19 टीम ने भारत के खिलाफ मैच खेला था, जिससे पीसीबी का दावा कमजोर होता है.
बायकॉट से हो सकता है नुकसान
बीसीसीआई अधिकारियों ने 'फोर्स मेज्योर' के बचाव को 'कमजोर' बताते हुए खारिज कर दिया है, और पाकिस्तान सरकार और पीसीबी के बीच करीबी संबंधों का ज़िक्र किया है. उनका तर्क है कि क्रिकेट में बेवजह राजनीति मिलाई जा रही है और लंबे समय से ये समझा जाता रहा है कि आईसीसी इवेंट्स के दौरान भारत और पाकिस्तान न्यूट्रल वेन्यूज पर एक-दूसरे का सामना करेंगे. उनके मुताबिक ये बॉयकॉट गलत है और खेल के लिए नुकसानदेह है.