Kaal Bhairav Story: भगवान शिव की नगरी काशी में काल भैरव भगवान को काशी के कोतवाल के नाम से जाना जाता है. ऐसी मान्यता है कि, काशी में बाबा विश्वनाथ से पहले काल भैरव की मर्जी चलती है. बता दें कि, काल भैरव भगवान भोलेनाथ के पांचवें अवतार हैं. रुद्रयामल तंत्र में कुल 64 भैरवों का उल्लेख मिलता है इनमें से भैरव भगवान के दो रूप की पूजा की जाती है. बटुक भैरव जिन्हें सौम्य और शांतिप्रिय माना जाता है. दूसरे काल भैरव की पूजा होती जिन्हें उग्र और दंडपाणि मानते हैं. काशी में भगवान काल भैरव को काशी का कोतवाल क्यों मानते हैं चलिए इसके बारे में जानते हैं.
कैसे बनें काल भैरव भगवान 'काशी के कोतवाल'
भगवान काल भैरव को काशी में 'काशी के कोतवाल' के नाम से जानते हैं. उन्हें शहर के रक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाला माना जाता है. काल भैरव के 'काशी के कोतवाल' बनने के पीछे पौराणिक कथा प्रचलित है. एक बार ब्रह्मा, विष्णु और महेश यानी शिव जी में विवाद हुआ कि तीनों में कौन श्रेष्ठ है. अंत में भगवान शिव को श्रेष्ठ माना गया. इस बात पर विष्णु जी मान गए लेकिन ब्रह्मा नाराज हुए.
---विज्ञापन---
ये भी पढ़ें - Garuda Purana: दाह संस्कार के बाद पीछे मुड़कर देखने की गलती न करें, जानें गरुड़ पुराण में छिपा रहस्य
---विज्ञापन---
ब्रह्मा जी ने शिव को अपमानित किया और शिव जी को क्रोध आया तब उनके काल भैरव अवतार का जन्म हुआ. शिव जी ने क्रोध में ब्रह्मा जडी का एक सिर काट दिया. उन्हें ब्रह्म हत्या का दंड भुगतना पड़ा. इसके लिए उन्हें कई सालों तक धरती पर भिखारी के रूप में भटकना पड़ा. जब वह काशी पहुंचे तो उनकी सजा पुरी हुई. उनका दंड समाप्त हुआ और भगवान शिव ने काल भैरव को काशी का कोतवाल बनाया.
---विज्ञापन---
भगवान काल भैरव की पूजा के लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काल भैरव भगवान की पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं. काल भैरव की पूजा से राहु और केतु के दोष का प्रभाव कम होता है. काशी के कोतवाल यानी काशी में काल भैरव मंदिर में पूजा करने से भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति मिलती है. पापों से मुक्ति, शत्रुओं पर विजय और जीवन में सुख-समृद्धि पाने के लिए आपको काल भैरव भगवान की पूजा करनी चाहिए.
---विज्ञापन---
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है।News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।
---विज्ञापन---