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Vijaya Ekadashi Kab Hai: 13 या 14 फरवरी, कब रखा जाएगा विजया एकादशी का व्रत, जानें सही तारीख और पारण का मुहूर्त

Vijaya Ekadashi Kab Hai: विजया एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है, जो हर साल फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. यह व्रत शत्रु, बाधा और कठिनाइयों से मुक्ति दिलाता है. आइए जानते हैं, यह व्रत कब रखा जाएगा और इसका पारण टाइमिंग क्या है?

Vijaya Ekadashi Kab Hai: विजया एकादशी हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है. इसका अर्थ है विजय दिलाने वाली एकादशी. ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है. विशेष रूप से यह व्रत उन लोगों के लिए लाभकारी है जो शत्रुओं, बाधाओं या जीवन की कठिनाइयों से परेशान हैं. पद्म पुराण के अनुसार, विजया एकादशी का फल वाजपेयी यज्ञ के समान पुण्यकारी है. इसका पालन करने से न केवल जीवन में सफलता मिलती है, बल्कि मन और परिवार में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. आइए जानते हैं, यह पुण्यदायी व्रत कब रखा जाएगा और इसका पारण टाइमिंग क्या है?

विजया एकादशी 2026 की तारीख

साल 2026 में विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा. यह व्रत हर साल फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है. इस वर्ष एकादशी तिथि का प्रारंभ 12 फरवरी दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से होगा और समाप्ति 13 फरवरी दोपहर 2 बजकर 25 मिनट तक है. इसलिए, उदय तिथि के अनुसार व्रत 13 फरवरी को ही रखा जाएगा.

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विजया एकादशी क्यों महत्वपूर्ण है

जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह व्रत विजय और सफलता का प्रतीक है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की भक्ति और व्रत करने से जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता मिलती है. विशेष रूप से यदि कोई व्यक्ति शत्रुओं, विरोधियों या नकारात्मक परिस्थितियों से परेशान है, तो यह व्रत उसके लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है.

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शत्रुओं पर विजय के लिए क्या करें

व्रत वाले दिन सुबह उठकर शुद्ध स्नान करें और व्रत का संकल्प लें. स्वास्थ्य ठीक हो तो केवल जल पर व्रत रखा जा सकता है. यदि स्वास्थ्य साथ न दे, तो हल्का फलाहार भी किया जा सकता है.

दिनभर भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें. सबसे सरल और प्रभावशाली मंत्र है – ऊं नमो भगवते वासुदेवाय. इसे श्रद्धा के साथ जप करने से शत्रुओं पर विजय और कार्यों में सफलता मिलती है.

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विजया एकादशी व्रत की सरल पूजा विधि

सुबह स्नान के समय पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाएं और हर हर गंगे का उच्चारण करें. पीले वस्त्र पहनें, यदि संभव न हो तो साफ सफेद वस्त्र पहन सकते हैं.

घर में भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर स्थापित करें. उन्हें पीले पुष्प अर्पित करें, तिलक लगाएं, अक्षत चढ़ाएं और घी का दीपक जलाएं. इसके बाद व्रत का संकल्प लें.

तुलसी की माला से 108 बार ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें और दिनभर समय-समय पर यही जाप करते रहें.

पारण: व्रत खोलने का शुभ समय

विजया एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी शनिवार 14 फरवरी, 2026 को सुबह 7 बजे से 9 बजे 14 मिनट तक किया जाएगा. वहीं, द्वादशी तिथि का समापन दोपहर 4 बजकर 1 मिनट पर होगा.

ध्यान रखें कि पारण के समय स्नान और ध्यान करने के बाद भगवान विष्णु को भोग अर्पित करें. इसके बाद व्रत खोलें. पारण सही समय पर करने से व्रत का फल अधिक प्राप्त होता है और जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं.

पौराणिक कथा

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब भगवान राम लंका विजय के लिए समुद्र तट पर पहुँचे, तब बगदालभ मुनि ने उन्हें विजया एकादशी का व्रत करने की सलाह दी. भगवान राम ने यह व्रत किया और इसके प्रभाव से उन्हें समुद्र पार करने और रावण पर विजय प्राप्त करने में सफलता मिली थी. इस कथा से स्पष्ट होता है कि विजया एकादशी संकट और शत्रु पर विजय का प्रतीक है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.


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