Shardiya Navratri 2025: नवरात्रि में व्रत और पूजा के बाद कन्या पूजन किया जाता है. कन्या पूजन के बाद ही नवरात्रि का समापन होता है. अष्टमी और नवमी तिथि को भक्त नौ कन्याओं और एक बालक को भोजन कराते हैं. नवरात्रि में व्रत के बाद सभी भक्त कन्या पूजन करते हैं. लेकिन कई स्थितियों में कन्या पूजन नहीं करना चाहिए. इस बार शारदीय नवरात्रि में 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को कन्या पूजन किया जाएगा. आप कन्या पूजन करने वाले हैं तो जान लें किन स्थितियों में कन्या पूजन नहीं करना चाहिए.

इन 3 स्थितियों में नहीं करना चाहिए कन्या पूजन

  • घर में मृत्यु होने पर

अगर आपको घर में किसी की मृत्यु हो जाती है तो इससे मृत्यु सूतक यानी अशुचिता का समय लग जाता है. आपको इस दौरान कोई भी पूजा-पाठ का कार्य नहीं करना चाहिए. मृत्यु सूतक में शुभ कार्य नहीं कर सकते हैं. इस दौरान आप कन्या पूजन नहीं कर सकते हैं. घर-परिवार में किसी की मृत्यु होने पर शुद्धिकरण के बाद ही पूजा कार्य कर सकते हैं.

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  • जन्म सूतक होने पर

घर-परिवार में किसी का जन्म हुआ है तो उसके बाद पूजा नहीं होती है. हवन और शुद्धिकरण के बाद ही पूजा करनी चाहिए. अगर घर में किसी का जन्म हुआ है तो आपको कन्या पूजन करने से बचना चाहिए. परिवार में बच्चा पैदा होने पर जन्म सूतक काल शुरू हो जाता है जिसमें पूजा नहीं करते हैं.

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  • मासिक धर्म के दौरान

महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान पूजा और व्रत नहीं करना चाहिए. अगर नवराात्रि के व्रत के दौरान बीच में मासिक धर्म शुरू हो जाता है तो कन्या पूजन नहीं करना चाहिए. धार्मिक मान्यातओं के अनुसार ऐसा करना सही नहीं होता है. आपको इन स्थितियों में कन्या पूजन करने से बचना चाहिए.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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