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Ramadan 2025: रमजान में पहला ‘अशरा’ क्या? कब से कब तक रहेगा, जानिए इसका महत्व

Ramadan 2025: रमजान इस्लाम धर्म का सबसे पाक महीना माना जाता है, जिसमें दुनिया भर के मुसलमान रोजा रखते हैं। इस महीने को तीन भागों में बांटा गया है, जिनको अशरा कहा जाता है। जानिए पहले अशरा का क्या महत्व होता है?

Ramadan 2025: अभी रमजान का महीना चल रहा है, रमजान इस्लाम धर्म में विशेष महत्व रखता है। जिसे तीन अशरों में विभाजित किया गया है, जिनमें से प्रत्येक दस दिनों का होता है। पहला अशरा, दूसरा अशरा और तीसरा अशरा। इन तीनों अशरा में मुसलमानों को अलग-अलग काम करने की सलाह दी गई है। यूं तो रमजान के पूरे महीने में इस पूरे रोजा, नमाज, कुरान पढ़ना, दान करना और इबादत में ज्यादा समय बिताया जाता है, लेकिन हर एक अशरा के दौरान मुससमानों को क्या करना चाहिए? आज आपको पहले अशरा के बारे में बताएंगे।

पहला अशरा क्या?

रमजान का पहला अशरा रहमत और बरकत का होता है, जो इस पाक महीने की शुरुआत से लेकर पहले 10 दिनों तक चलता है। इसे दया और कृपा के लिए जाना जाता है। इस दौरान अल्लाह की रहमत रोजेदारों पर बरसती है। इसके अलावा, मुसलमानों को अधिक से अधिक इबादत करने, नमाज अदा करने और कुरान पढ़ने की हिदायत दी जाती है। इस अशरा को खास तौर पर दान देना और गरीबों की सहायता करने के लिए रखा गया है। इस अशरे में लोग अल्लाह से दया की प्रार्थना करते हैं और अच्छे कामों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। ये भी पढ़ें: मुगलों के दौर में कैसी थी सहरी और इफ्तार की रौनक? जानें ईद से ज्यादा किस त्योहार में रहती थी धूम?

कोई भूखा न रहे

रमजान के पूरे महीने में लोग मगफिरत की दुआ करते हैं और जरूरतमंद लोगों की मदद करते हैं। जकात और फितरा अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार अदा करते हैं, ताकि रमजान के पवित्र महीने में कोई भी गरीब भूखा न रहे, आपके द्वारा की गई मदद से उसका रोजा आसानी से बीत सकता है। पहले अशरा में ऐसे ही लोगों की मदद के लिए कहा गया है। आपको बता दें कि रमजान की शुरुआत 2 मार्च से हो गई है, 30 रोजे पूरे होने के बाद 1 या 2 अप्रैल को ईद मनाई जाएगी। ये भी पढ़ें: रमजान में इन 5 तरह के लोगों को मिलती है छूट! रोजा न रखने पर नहीं होता ‘गुनाह’


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