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बेहद पवित्र होता है पति-पत्नी का अटूट बंधन, लेकिन इस स्थिति में कर दें त्याग, प्रेमानंद महाराज ने बताया

Premanand Maharaj: पति-पत्नी का प्रेम बंधन बेहद पवित्र होता है. पति-पत्नी के रिश्ते को सात जन्मों का साथ माना जाता है लेकिन प्रेमानंद महाराज ने बताया है कि, किस स्थिति में इस रिश्ते का त्याग कर देना चाहिए. चलिए इसके बारे में जानते हैं.

Photo Credit- News24GFX

Premanand Maharaj: वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज लोगों को जीवन से जुड़ी बातों के बारे में बताते हैं. वह अपने प्रवचन के दौरान लोगों को कई विषयों पर ज्ञान देते हैं. प्रेमानंद महाराज ने पति-पत्नी के रिश्तों को लेकर काफी कुछ बताया है. पति-पत्नी के अटूट बंधन में प्यार, विश्वास और सम्मान होना चाहिए. लेकिन कई बार दोनों के बीच अनबन हो जाती है और रिश्ते खराब हो सकते हैं. ऐसे में रिश्तों संभालना चाहिए लेकिन उन्होंने ऐसी स्थिति बताई है जब इस रिश्ते का त्याग कर देना चाहिए.

इस स्थिति में कर दें रिश्ते का त्याग

पति-पत्नी दोनों में से कोई यदि अपने साथी को धोखा देता है तो इस स्थिति में रिश्ते का त्याग कर देना चाहिए. यदि पति अपनी पत्नी को छोड़कर किसी और के साथ व्यभिचाचर करती है तो पति को रिश्ता तोड़ देना चाहिए. पत्नी अपने पति को छोड़कर अन्य के साथ संबंध बनाती है और व्यभिचाचर करती है तो इस रिश्ते का त्याग कर दें. पराई स्त्री के साथ और दूसरे पुरुष के साथ संबंध बनाने वाली साथी का त्याग कर देना चाहिए.

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ऐसी पत्नी का न करें त्याग

पति को धोखा देने वाली पत्नी का त्याग कर देना चाहिए. ऐसी स्त्री का त्याग न करें जो पति से खूब प्रेम करती है. पत्नी पति से खूब प्रेम करती है लेकिन कभी उसे गाली देती है तो इस स्थिति में उसका त्याग न करें. यह गलती वह अपने अवगुणों के कारण कर सकती है. पत्नी अपने अवगुणों के कारण भला-बुरा कहती है तो उसका त्याग नहीं करना चाहिए. लड़ाई-झगड़े में एक-दूसरे के दोष को देखने की बजाय प्रेम और सहयोग को बढ़ावा दें.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।


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