Narad Vaani: मानव जीवन का उद्देश्य केवल धन या सफलता पाना नही, बल्कि आंतरिक सुख और संतुलन भी है। परम विष्णु-भक्त महाज्ञानी नारद जी ने युधिष्ठिर को धर्म के जो सूत्र बताए, वे आज के समय मे भी उतने ही उपयोगी है। ये 5 गुण जीवन की दिशा बदल सकते है और व्यक्ति को सच्चे अर्थो मे सुखी बना सकते है। आइए जानते हैं, ये 5 गुण क्या-क्या हैं?
सत्य का मार्ग अपनाएं
नारद जी के अनुसार सत्य सबसे बडा धर्म है। सत्य बोलने वाला व्यक्ति भीतर से निडर रहता है। आज के समय मे झूठ आसान लग सकता है, पर उसका परिणाम कष्टदायक होता है। सत्य से बना विश्वास लंबे समय तक साथ देता है। सत्य का पालन करने से आत्मबल बढता है और जीवन सरल बनता है।
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दयावान बनें
दया मनुष्य को मनुष्य बनाती है। नारद जी कहते है कि दया केवल कमजोर के लिए नही, बल्कि हर जीव के लिए होनी चाहिए। दया का भाव रखने से मन शांत रहता है। जब व्यक्ति दूसरो के दुख को समझता है, तब उसका हृदय विशाल होता है। दया से समाज मे प्रेम और सहयोग बढता है।
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पवित्रता से पाएं समृद्धि
पवित्रता केवल बाहरी स्वच्छता तक सीमित नही। मन, विचार और कर्म की पवित्रता भी आवश्यक है। नारद जी बताते है कि जिस घर और मन मे पवित्रता होती है, वहा सकारात्मक ऊर्जा रहती है। ऐसा वातावरण शांति और समृद्धि को आकर्षित करता है।
तपश्चर्या से आएगा संयम
तपश्चर्या का अर्थ केवल कठोर साधना नही, बल्कि विचार और वाणी पर नियंत्रण भी है। नारद जी कहते है कि बोलने से पहले विचार करना चाहिए। क्रोध और जल्दबाजी से कही गई बात जीवन मे समस्या ला सकती है। संयम से लिया गया निर्णय सदा हितकारी होता है।
तितिक्षा लाएगी स्थिरता
तितिक्षा यानी सहनशीलता। सुख और दुख दोनो को समान भाव से स्वीकार करना ही तितिक्षा है। नारद जी के अनुसार बदले की भावना मन को अशांत करती है। सहनशील व्यक्ति हर परिस्थिति मे संतुलित रहता है और आगे बढता है।
नारद जी की ये पांच शिक्षाएं जीवन को सरल, सफल और सुखी बनाने का मार्ग दिखाती है। सत्य, दया, पवित्रता, तपश्चर्या और तितिक्षा को अपनाकर कोई भी व्यक्ति अपने भाग्य को नई दिशा दे सकता है। यही सच्चा धर्म और सच्ची खुशहाली का आधार है।
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।