Masik Janmashtami 2026: आज सोमवार, 9 फरवरी 2026 को फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित साल की दूसरी मासिक जन्माष्टमी मनाई जा रही है. हिन्दू मान्यता के अनुसार, मासिक जन्माष्टमी हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आती है, क्योंकि यह भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ी है. वहीं, मुख्य जन्माष्टमी साल में एक बार भाद्रपद माह में मनाई जाती है, जबकि मासिक जन्माष्टमी हर महीने होती है. इसे व्रत, पूजा और व्यक्तिगत साधना के लिए बहुत शुभ माना जाता है. आइए जानते हैं आज भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा मंत्र क्या है और उन्हें कौन-सा भोग अर्पित करना चाहिए?
भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का शुभ मुहूर्त
मासिक जन्माष्टमी में रात की पूजा का विशेष महत्व होता है. मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म आधी रात में हुआ था, जिसे 'निशिता काल' कहा जाता है. इसी कारण इस समय की गई पूजा बहुत फलदायी मानी गई है. द्रिक पंचांग में, फाल्गुन मास की मासिक जन्माष्टमी पर निशिता काल में पूजा करने का विशेष शुभ समय इस प्रकार बताया गया है"
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निशिता पूजा का शुभ समय: रात 12:09 ए एम से 01:01 ए एम (फरवरी 10, 2026)
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आम दिनों की पूजा की तुलना में मासिक जन्माष्टमी की रात शुभ समय में की गई पूजा का विशेष महत्व होता है. इस समय भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से व्रत और भक्ति का पूरा फल प्राप्त होता है.
भगवान श्रीकृष्ण को लगाएं ये भोग
फाल्गुन का महीना आते ही प्रकृति में वसंत का जादू बिखरने लगता है. मधुमास की सुगंध और सुहावना मौसम मन को भक्ति और उल्लास से भर देता है. आज फाल्गुन कृष्ण अष्टमी के शुभ अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण और राधाजी की विशेष सेवा का विधान है. मान्यता है कि इस दिन कन्हैया को उनकी पसंद का भोग लगाने से घर में सुख-समृद्धि और प्रेम का वास होता है. आइए जानते हैं भगवान श्रीकृष्ण के वे 3 दिव्य भोग, जो उन्हें सबसे अधिक प्रिय हैं:
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केसरिया माखन-मिश्री का विशेष भोग
फाल्गुन की ठंडक और वसंत की मिठास को देखते हुए आज भगवान श्रीकृष्ण को ताजा सफेद माखन अर्पित करें. इस माखन में थोड़ी सी मिश्री और केसर के धागे जरूर मिलाएं. केसर का पीला रंग वसंत ऋतु का प्रतीक है और यह कान्हा को बहुत लुभाता है. यह भोग लगाने से मन की चंचलता दूर होती है और एकाग्रता बढ़ती है.
पंचमेवा युक्त पंजीरी का भोग
आज फाल्गुन अष्टमी पर धनिया या आटे की पंजीरी बनाकर उसमें देसी घी, बुरा (चीनी) और पांच प्रकार के मेवे यानी काजू, बादाम, पिस्ता, किशमिश और मखाना मिलाएं. श्रीकृष्ण को पंजीरी का भोग लगाने से पारिवारिक क्लेश खत्म होते हैं और अटके हुए काम पूरे होने लगते हैं.
ताजी रबड़ी और मालपुआ
फाल्गुन का महीना उत्सव का महीना है, इसलिए इस दिन प्रभु को रबड़ी और मालपुआ का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना गया है. केसर और इलायची से महकती गाढ़ी रबड़ी के साथ देसी घी में बने मालपुए का मेल वसंत के आनंद को बढ़ा देता है. यह भोग लगाने से वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है और संतान संबंधी सुख प्राप्त होते हैं.
इसका रखें ध्यान
आप भगवान को कोई भी भोग अर्पित करें, लेकिन उसमें तुलसी का पत्ता यानी तुलसी दल डालना कभी न भूलें. बिना तुलसी के भगवान श्रीकृष्ण किसी भी प्रकार का भोग स्वीकार नहीं करते हैं. दूसरी महत्वपूर्ण बात यह कि यह वासंतिक जन्माष्टमी है, इसलिए भगवान श्रीकृष्ण-राधा जी को अबीर-गुलाल अर्पित करना न भूलें.
इन मंत्रों से करें पूजा
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय - यह सर्व कार्य सिद्धि मंत्र है, जिसके जप से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और रुके कार्य आगे बढ़ते हैं.
क्लीं कृष्णाय गोविंदाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा - यह सुख-समृद्धि और दांपत्य प्रेम का मंत्र है, जो आर्थिक स्थिरता और आपसी प्रेम को मजबूत करता है.
श्री कृष्ण शरणं मम - यह भय और शत्रु बाधा दूर करने का मंत्र है. इसका जाप आत्मविश्वास देता है और मन को सुरक्षित अनुभूति कराता है.
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने. प्रणत क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः - यह मंत्र जीवन के हर प्रकार के क्लेश (कष्ट) को हरने वाला माना गया है. इससे मन को आंतरिक शांति का अनुभव होता है.
ॐ श्री कृष्णाय नमः - यह मंत्र विद्यार्थियों की एकाग्रता को बढ़ाता है.
इन मंत्रों के अलावा आप 'मधुराष्टकम' का पाठ कर सकते हैं. संतान सुख के लिए 'संतान गोपाल मंत्र' का भी जाप कर सकते हैं.
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