भगतो को दर्शन दे गयी रे एक छोटी सी कन्या
छोटी सी कन्या, एक छोटी सी कन्या
भक्तो ने पुछा मैया नाम तेरा क्या है
वैष्णो नाम बता गयी रे एक छोटी सी कन्या
भक्तो ने पुछा मैया धाम क्या है
परबत त्रिकुट बता गयी रे एक छोटी सी कन्या
भक्तो में पुछा मैया सवारी तेरी क्या है
पीला शेर बता गयी रे एक छोटी सी कन्या
भक्तो में पुछा माँ प्रशाद तेरा क्या है
हलवा पूरी चना बता गयी रे एक छोटी सी कन्या
भक्तो में पुछा मैया श्रृंगार तेरा क्या है
चोला लाल बता गयी रे एक छोटी सी कन्या
भक्तो में पुछा मैया शस्त्र तेरा क्या है
त्रिशूल चक्र बता गयी रे एक छोटी सी कन्या
भक्तो ने पुछा सबसे प्यारा तेरा क्या है
भक्तो का प्यार बता गयी रे एक छोटी सी कन्या
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Navami Wishes 2025: जयकारा शेरावाली दा… ये संदेश भेजकर दीजिए सभी को नवमी की शुभकामनाएं
नवरात्रि के पहले दिन जिन लोगों ने अपने घर में कलश की स्थापना की है, वो कल यानी 2 अक्टूबर 2025 को कलश विसर्जन कर सकते हैं. द्रिक पंचांग के अनुसार, 2 अक्टूबर 2025 को सुबह 06:15 से सुबह 08:37 मिनट तक कलश विसर्जन का शुभ मुहूर्त है.
जिन लोगों ने नवरात्रि के 9 दिनों के व्रत का संकल्प लिया है, वो कल दुर्गा विसर्जन करने के बाद व्रत का पारण कर सकते हैं. वहीं, जिन्होंने केवल नवमी तिथि के व्रत का संकल्प लिया है, वो आज कन्या पूजन के बाद या शाम में मां दुर्गा की पूजा करने के बाद व्रत खोल सकते हैं.
हवन करने के लिए हवन कुंड होना जरूरी है. इसके अलावा 7 से 11 लौंग, 3 से 5 सुपारी, 1 फूलों की माला, 3 या 5 आम के पत्ते, 5 अगरबत्ती, 1 सूखा नारियल, 5 प्रकार के फल, 5 से 7 मिठाई के टुकड़े, 10 से 12 आम की लकड़ी, 3 से 5 पान के पत्ते और 1 लाल कपड़ा होना चाहिए. साथ ही चरणामृत, लाल कलावा, रोली, शुद्ध घी, गंगाजल, चावल, गुग्गल, लोबान, शहद और कपूर की भी जरूर पड़ती है.
वन्दे वाञ्छित मनोरथार्थ चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
कमलस्थिताम् चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्विनीम्॥
स्वर्णवर्णा निर्वाणचक्र स्थिताम् नवम् दुर्गा त्रिनेत्राम्।
शङ्ख, चक्र, गदा, पद्मधरां सिद्धीदात्री भजेम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोला पीन पयोधराम्।
कमनीयां लावण्यां श्रीणकटिं निम्ननाभि नितम्बनीम्॥
महानवमी के दिन यानी आज हवन करने का शुभ मुहूर्त सुबह 06:14 मिनट से लेकर शाम 06:07 मिनट तक है. इस दौरान कभी भी आप हवन कर सकते हैं.
कञ्चनाभा शङ्खचक्रगदापद्मधरा मुकुटोज्वलो।
स्मेरमुखी शिवपत्नी सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते॥
पटाम्बर परिधानां नानालङ्कार भूषिताम्।
नलिस्थिताम् नलनार्क्षी सिद्धीदात्री नमोऽस्तुते॥
परमानन्दमयी देवी परब्रह्म परमात्मा।
परमशक्ति, परमभक्ति, सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते॥
विश्वकर्ती, विश्वभर्ती, विश्वहर्ती, विश्वप्रीता।
विश्व वार्चिता, विश्वातीता सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते॥
भुक्तिमुक्तिकारिणी भक्तकष्टनिवारिणी।
भवसागर तारिणी सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते॥
धर्मार्थकाम प्रदायिनी महामोह विनाशिनीं।
मोक्षदायिनी सिद्धीदायिनी सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते॥
नवरात्रि की नवमी तिथि पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं. उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट भी साझा किया है.
आप सभी को महानवमी की हार्दिक शुभकामनाएं! नवरात्रि का यह शुभ अवसर हर किसी के लिए सौभाग्य, समृद्धि और सफलता लेकर आए, यही कामना है।https://t.co/wPTmP1lKpN
— Narendra Modi (@narendramodi) October 1, 2025
कन्या पूजन के दौरान कन्याओं को पैसे, लोहे की कोई भी चीज या कांच का सामान नहीं देना चाहिए. इसके अलावा चमड़े, स्टील, प्लास्टिक और पुरानी या इस्तेमाल की गई चीजों को देना भी शुभ नहीं होता है.
कन्या पूजन के दौरान कन्याओं को बैग, कपड़े, गुल्लक, ड्राई फ्रूट और लंच बॉक्स देना शुभ होता है. इसके अलावा आज आप उन्हें सजने-संवरने की चीजें या खाने का सामान भी दे सकते हैं.
आज 1 अक्टूबर 2025 को नवमी तिथि पर कन्या पूजन के लिए 2 शुभ मुहूर्त हैं. पहला मुहूर्त सुबह 05:01 मिनट से लेकर सुबह 06:14 मिनट था, जिसके बाद अब दूसरा मुहूर्त दोपहर 02:09 मिनट से लेकर दोपहर 02:57 मिनट तक है.
ॐकारः पातु शीर्षो माँ, ऐं बीजम् माँ हृदयो।
हीं बीजम् सदापातु नभो गृहो च पादयो॥
ललाट कर्णो श्रीं बीजम् पातु क्लीं बीजम् माँ नेत्रम् घ्राणो।
कपोल चिबुको हसौ पातु जगत्प्रसूत्यै माँ सर्ववदनो॥
आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में स्थित देवी कन्याका परमेश्वरी मंदिर को महानवमी के शुभ अवसर पर 5 करोड़ के नोटों, 7 किलो सोने और 12 किलो चांदी से सजाया गया है. मां कन्याका परमेश्वरी देवी को पार्वती या लक्ष्मी का अवतार माना जाता है.
जय सिद्धिदात्री मां तू सिद्धि की दाता। तु भक्तों की रक्षक तू दासों की माता॥
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि। तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि॥
कठिन काम सिद्ध करती हो तुम। जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम॥
तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है। तू जगदम्बें दाती तू सर्व सिद्धि है॥
रविवार को तेरा सुमिरन करे जो। तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो॥
तू सब काज उसके करती है पूरे। कभी काम उसके रहे ना अधूरे॥
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया। रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया॥
सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली। जो है तेरे दर का ही अम्बें सवाली॥
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा। महा नन्दा मन्दिर में है वास तेरा॥
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता। भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता॥
Maha Navami Navratri 2025, Shubh Muhurat, Puja Vidhi: आज 1 अक्टूबर को शारदीय नवरात्रि की नवमी तिथि है. नवमी को कन्या पूजन करने का महत्व होता है. नवमी तिथि को नवरात्रि का समापन हो जाता है और इस दिन दुर्गा विसर्जन भी होता है. नवरात्रि में नौवां दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित होता है. शारदीय नवरात्रि की नवमी तिथि को महानवमी भी कहते हैं.
नवमी को कन्या पूजन में नौ कन्याओं और एक बालक को भोजन कराना चाहिए. इससे मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामना पूर्ण करती हैं. नवमी तिथि पर मां सिद्धिदात्री को पूजते हैं. उनका स्वरूप बेहद ही निराला है. उनकी सवारी सिंह है. मां की चार भुजाएं हैं. एक हाथ में गदा, दूसरे में चक्र, तीसरे हाथ में कमल का फूल और चौथे हाथ में शंख सुशोभित है.
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