Bhishma Ashtami 2026: भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान था. उन्होंने 58 दिनों तक बाणों की शैय्या पर जीवित रहने के बाद मकर संक्रांति पर माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को प्राण त्यागे थे. वह बाणों की शैय्या पर सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा कर रहे थे. ऐसी मान्यता है कि, मकर संक्रांति पर मृत्यु से मौक्ष की प्राप्ति होती है. भीष्म पितामह ने जिस दिन प्राण त्यागे उस तिथि को भीष्मा अष्टमी के तौर पर मनाया जाता है. यह दिन भी पितरों के तर्पण और पितृ दोष से मुक्ति के लिए खास होता है.
कब है भीष्म अष्टमी? (Bhishma Ashtami Kab Hai)
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द्रिंक पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 25 जनवरी की रात को 11 बजकर 10 मिनट पर होगी. यह माघ शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि 26 जनवरी 2026 की रात को 9 बजकर 17 मिनट तक मान्य रहेगी. ऐसे में उदयतिथि को महत्व देते हुए भीष्म अष्टमी का पर्व 26 जनवरी 2026, दिन सोमवार को मनाया जाएगा. भीष्म अष्टमी पर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 29 मिनट से दोपहर को 1 बजकर 38 मिनट तक रहेगा.
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भीष्म अष्टमी का महत्व (Bhishma Ashtami Significance)
भीष्म अष्टमी पर व्रत रखा जाता है यह दिन पितरों के तर्पण के लिए खास होता है. भीष्म अष्टमी पर पितरों का तर्पण और श्राद्ध क्रिया करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है. इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है. इस दिन पितरों का तर्पण करने और पितृ दोष निवारण के उपायों को करने से सात पीढ़ियों के पितर तृप्त होते हैं और घर-परिवार में सुख-शांति आती है.
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