समाज का रिवाज- महिलाओं को कसूरवार ठहराना
प्रोफेशनल लाइफ हो या पर्सनल, जहां एक से ज्यादा व्यक्तियों का समावेश होता है, वहां सफलता या विफलता किसी एक पर नहीं टिकी होती। इसलिए किसी एक पर अंगुली उठाना पूरी तरह गलत है। हालांकि, जब रिश्ते की बात आती है तो हमारा समाज विफलता के लिए किसी एक को कसूरवार ठहराना ज्यादा पसंद करता है। वहीं पसंद का यह पलड़ा महिला की तरफ ज्यादा झुक जाता है। पूरी तरह मान लिया जाता है कि रिश्ते की गाड़ी को पटरी से उतारने की जिम्मेदारी महिला की ही है। उस पर जिम्मेदारी का बोझ लाद दिया जाता है। रिश्तों पर उसकी कोई सलाह, सोच औचित्यहीन और आधारहीन बन जाती है। इस तरह की सोच का सामना केवल लोअर क्लास या मिडिल क्लास ही नहीं, बल्कि अपर क्लास की महिलाओं को भी करना पड़ता है।
शादी नहीं बचा पाना, किरण का सही आंकलन नहीं
एक्टर आमिर खान की वाइफ किरण राव को लेकर सोशल मीडिया पर जो कुछ चल रहा है, वह इसी का नमूना है। दरअसल, किरण शादी पर फिल्म बनाने वाली हैं, लेकिन चूंकि वह खुद शादी के रिश्ते में विफल रही हैं, इसलिए कुछ लोगों को उनका शादी पर बात करना, शादी विषय पर फिल्म बनाना रास नहीं आ रहा है। उन्हें लगता है कि किरण राव को यदि शादी की इतनी ही समझ होती तो आमिर के साथ उनका रिश्ता यूं ही न टूटता। आमिर और किरण की शादी ज्यादा लंबी नहीं चली, यह तो पूरी तरह सच है, लेकिन इसके लिए किरण को कसूरवार ठहराना और यह मान लेना कि उन्हें रिश्तों की समझ नहीं, सही आंकलन नहीं है।
मूवी बनाने दें, देखने के बाद ही लोग प्रतिक्रिया दें
किसी रिश्ते को समझने के लिए उसे लंबे वक्त तक जीना जरूरी नहीं। समझने वाले चंद पलों में ही सबकुछ समझ जाते हैं। वहीं न समझने वालों के लिए पूरी उम्र कम पड़ जाती है। शादी पर फिल्म बनाने के लिए निर्माता का शादी में सफल होना जरूरी नहीं है। वैसे भी रिश्ते में रहना, न रहना किरण और आमिर का निजी फैसला था, लेकिन उसे आधार बनाकर किसी को कटघरे में खड़ा करना, दूसरों की जिंदगी में दखलंदाजी की आदत के अलावा कुछ नहीं है। इस आदत को अब बदला जाना चाहिए। आज जब हम आर्टिफियल इंटेलिजेंस की बात करते हैं तो इस तरह की सोच हमारे मानसिक विकास पर प्रश्नचिन्ह लगाती है। बेहतर होगा कि हम पहले किरण राव को फिल्म बनाने दें और उसे देखने के बाद अपनी प्रतिक्रिया दें, लेकिन वह रिएक्शन भी उनकी फिल्म निर्माण कला पर होना चाहिए, न कि उनकी पर्सनल लाइफ पर।
दोनों ने अपने रिश्तों-अलगाव को बखूबी हैंडल किया
यहां एक बात और काबिलेगौर है। एक असफल रिश्ता इसकी खूबी और कमी दोनों को स्पष्टता से रेखांकित करता है। अगर आप एक मेच्योर इंसान हैं तो इन सबसे सीख कर आगे बढ़ते हैं। आमिर और किरण के रिश्ते की खूबसूरती यही है कि अलग होने के बावजूद वे परिवार से भावनात्मक तौर पर जुड़े हैं। अक्सर समारोहों में दोनों साथ नजर आते हैं। किरण आमिर खान के प्रोडक्शन के लिए फ़िल्म बना रही है, क्या यह इस बात का सुबूत नहीं कि दोनों ने अपने रिश्तों और अलगाव को बखूबी हैंडल किया है। दरअसल यह देखने, सोचने और सीखने वाली बात है, न कि ट्रोल करके उनका कद कम करने की, नकारात्मक अप्रोच अपनाने की।
संबंधित खबरें
दिमाग की हिंसा विचार की लड़ाई, इसे हराने का मजबूत हथियार है 'सवाल'
44 days agoमार्क्सवाद और नक्सलबाड़ी से लेकर सशस्त्र क्रांति तक.. भारत में कैसे शुरू हुआ नक्सलवाद
45 days ago'दिमागी नक्सल' आखिर कौन? समझिए असहमति और उग्र विचारधारा के बीच की पतली रेखा
46 days agoदलगत भावनाओं से ऊपर है नामकरण की योगी दृष्टि
66 days agoनिर्विघ्न कांवड़ यात्रा के लिए तैयार उत्तर प्रदेश
68 days agoसंत शिरोमणि रविदास के प्रति कृतज्ञता, योगी सरकार का समरसता का संकल्प
69 days agoकांवड़ यात्रा: आस्था, सेवा और सामाजिक समरसता का महापर्व
76 days agoचुनावी दबाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का अयोध्या प्रेम
95 days agoक्या अब संविधान में 'चौथा स्तंभ' को स्पष्ट मान्यता देने का समय आ गया है?
129 days agoक्यों दक्षिण का अभिनेता बन जाता है CM और भोजपुरी का स्टार भीड़ तक रह जाता है सीमित
153 days agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines