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शब-ए-बारात 2026 भारत में कब है, 3 या 4 फरवरी? जानिए 15वीं शाबान की मगफिरत वाली रात का महत्व

Shab e Barat 2026: शब-ए-बारात को इस्लाम के सबसे पवित्र रातों में से एक माना जता है, जोकि शाबान की 15 तरीख को मनाई जाती है. हालांकि, कई लोगों के बीच तारीख को लेकर थोड़ा कंफ्यूजन है कि इस्लामी कैलेंडर में शाबान की 15 तारीख फरवरी में कौनसा दिन होगा 3 या 4 फरवरी. आइए जानते हैं.

भारत में कब है शब-ए-बारात?

शब-ए-बारात आज से नहीं, बल्कि कई सालों से हर साल मनाया जाता है, जिसे मगफिरत (माफी की रात) भी कहा जाता है. माना जाता है कि यह रात इस्लाम की उन मुकद्दस(पवित्र) रातों में से एक है, जिसमें इंसान को उसके गुनाह की माफी मिलती है और उसके तकदीर के फैसले होते हैं. साथ ही इसी रात के कुछ दिनों बाद से रमजान का पवित्र महीने का भी आगाज हो जाता है, जो दुनियाभर के मुलमानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण महीना होता है. इस स्टोरी में हम आपको बताएंगे, कि भारत में ये रात किस दिन पड़ रही है और इस रात का इस्लाम में कितना महत्व है.

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भारत में कब मनाई जाएगी शब-ए-बारात?

इस्लामी धर्मगुरुओं के अनुसार, भारत में शाबान की 15वीं तारीख मंगलवार, 3 फरवरी को मगरिब यानी शाम 6 बजे से शुरू होगी और अगले दिन, बुधवार 4 फरवरी तक चलेगी. इस दिन और इसके अगले दिन लोग कुरआन पढ़ते हैं, सहरी करके रोजा रखते हैं और खूब दुआ करते हैं, ताकि उनकी मगफिरत हो जाए.

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शब-ए-बारात क्यों बहुत खास रात है

शब-ए-बारात की रात मुसलमान बड़ी खुशियों और इमान के साथ मनाते हैं. लोग इस इस दिन पूरी रात जागकर नमाज पढ़ते हैं, कुरआन की तिलावत करते हैं और अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं. कई लोग अपने बुज़ुर्गों और पूर्वजों की याद में कब्रिस्तान जाकर उनके लिए दुआ करते हैं. साथ ही इस दिन घरों में खास तौर पर हलवा बनाया जाता है, जिसे परिवार और पड़ोसियों में बाटा जाता है. माना जाता है कि अल्लाह इस रात अपने बंदों की हर दुआ सुनते हैं और उन्हें माफ कर देते हैं, इसलिए यह रात बेहद पाक और फजीलती वाली है.

इस रात को लेकर दो अलग नजरिये

हालांकि, इस रात को लेकर मुलमानों में दो अलग नजरिये हैं, एक वह लोग जो इसे बहुत पवित्र मानते हैं और हलवा, मगफिरत से जोड़ते हैं. वहीं, दूसरी ओर मुसलमानों की एक बड़ी आबादी ऐसी है, जो इस रात का इनकार करती है और सिर्फ रमजान की 5 अहम रातों को फॉलो करती है. उनका मानना है कि कुरआन (Quran on Shab-e Barat) और हदीस (Hadith on Shab-e-Barat) में सिर्फ शब-ए-कदर की रात का जिक्र है, जिसमें तमाम इंसान के रिज्क और जिंदगी के सभी फैसले होते हैं और हर दुआ कबूल होती है. यही वजह है कि यह रात सिर्फ भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि देशों में बड़े धूमधाम से मनाई जाती है, जबकि अरब देशों में ऐसी कोई रौनक दिखाई नहीं देती है.

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