उत्तर प्रदेश सरकार की डेटा सेंटर नीति ने प्रदेश को देश के तेजी से उभरते डिजिटल हब के रूप में स्थापित कर दिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अपनाई गई दूरदर्शी नीतियों का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश आज न केवल निवेशकों का भरोसा जीत रहा है बल्कि डिजिटल आधारभूत संरचना के क्षेत्र में नई मिसाल भी कायम कर रहा है.
प्रदेश सरकार द्वारा जनवरी 2021 में डेटा सेंटर नीति को अधिसूचित किया गया था. इस नीति का उद्देश्य प्रदेश में आधुनिक निजी डेटा सेंटर पार्कों का विकास करना और डेटा सेंटर उद्योग को सशक्त आधार प्रदान करना था. नीति के अंतर्गत प्रारंभिक चरण में तीन डेटा सेंटर पार्क विकसित करने और 250 मेगावाट क्षमता के डेटा सेंटर उद्योग को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया था. उल्लेखनीय है कि सरकार ने इन लक्ष्यों को पहले ही वर्ष में प्राप्त कर लिया.
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लक्ष्यों की समय से पहले प्राप्ति के बाद प्रदेश सरकार ने नीति को और अधिक व्यावहारिक और निवेश अनुकूल बनाते हुए इसमें संशोधन किया. संशोधित नीति के अंतर्गत प्रदेश में डेटा सेंटर क्षेत्र के लिए निवेश और क्षमता के लक्ष्यों को कई गुना बढ़ा दिया गया. अब तीन के स्थान पर 8 डेटा सेंटर पार्क स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है. इसके साथ ही 30,000 करोड़ के अनुमानित निवेश से 900 मेगावाट क्षमता विकसित करने का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया है.
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प्रदेश में अब तक लगभग 21,343 करोड़ के निवेश को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है. इन परियोजनाओं के माध्यम से 6 डेटा सेंटर पार्क और 40 मेगावाट से कम क्षमता वाली 2 डेटा सेंटर इकाइयों को मंजूरी दी गई है. इनमें से 7 परियोजनाएं पूरी तरह संचालित हो चुकी हैं, जिससे प्रदेश की डिजिटल क्षमताओं को मजबूती मिली है. योगी सरकार की स्पष्ट नीति, पारदर्शी शासन व्यवस्था और मजबूत कानून-व्यवस्था ने उत्तर प्रदेश को निवेश के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद गंतव्य बनाया है. डेटा सेंटर जैसे पूंजी और तकनीक आधारित क्षेत्र में निवेशकों का बढ़ता विश्वास इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश सरकार की नीतियां जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू हो रही हैं.