पुणे महानगरपालिका (पीएमसी) चुनाव में वडगांव शेरी के वार्ड नंबर 3 से भारतीय जनता पार्टी ने ऐसी सियासी सुनामी खड़ी कर दी, जिसने विपक्ष को पूरी तरह हाशिये पर धकेल दिया. बीजेपी उम्मीदवार ऐश्वर्या सुरेंद्र पठारे ने 15 हजार से अधिक वोटों की ऐतिहासिक बढ़त के साथ रिकॉर्डतोड़ जीत दर्ज की. नतीजे इतने एकतरफा रहे कि वार्ड नंबर 3 में बीजेपी ने क्लीन स्वीप करते हुए सभी चार सीटें अपने नाम कर लीं.
इस प्रचंड जीत के पीछे जिस रणनीति की सबसे ज्यादा चर्चा है, वह है बीजेपी नेता सुरेंद्र पठारे का आख़िरी क्षणों में लिया गया बड़ा फैसला. नामांकन के अंतिम दिन उम्मीदवार बदलने का कदम विपक्ष के लिए पूरी तरह अप्रत्याशित साबित हुआ. जहां विपक्ष सुरेंद्र पठारे को केंद्र में रखकर अपनी चुनावी गणित बैठा रहा था, वहीं ऐन वक्त पर उनकी जगह ऐश्वर्या पठारे को मैदान में उतारकर बीजेपी ने पूरे चुनाव की दिशा ही बदल दी.
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अंतिम क्षणों तक यह लगभग तय माना जा रहा था कि सुरेंद्र पठारे स्वयं वार्ड नंबर 3 से चुनाव लड़ेंगे. लेकिन स्थानीय सामाजिक समीकरण, महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक भूमिका और भविष्य के नेतृत्व को मजबूत करने की सोच के साथ उन्होंने खुद पीछे हटने का फैसला लिया. चुनाव परिणामों ने साफ कर दिया कि यह निर्णय जोखिम नहीं, बल्कि राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक था.
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चुनावी अभियान के दौरान ऐश्वर्या पठारे ने नारेबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से दूरी बनाते हुए काम और डिलिवरी को अपना एजेंडा बनाया. उन्होंने लोहगांव और विमान नगर के लिए स्पष्ट विकास रोडमैप पेश किया, जिसमें सड़कों की मरम्मत, जलापूर्ति, कचरा प्रबंधन और ट्रैफिक जाम जैसे रोजमर्रा के नागरिक मुद्दों पर फोकस रहा. उनके 100 दिन के एक्शन प्लान ने मतदाताओं को यह भरोसा दिया कि जीत के बाद भी काम की रफ्तार थमेगी नहीं.
महिला मतदाताओं को साधने के लिए बीजेपी ने इस वार्ड में अलग और आक्रामक रणनीति अपनाई. ऐश्वर्या पठारे के नेतृत्व में महिलाओं के लिए विशेष घोषणापत्र जारी किया गया, जिसमें सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, रोजगार के अवसर, आत्मनिर्भरता और बुनियादी नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता दी गई. इस केंद्रित प्रयास का सीधा असर वोटिंग पैटर्न पर दिखाई दिया.
लोहगांव–विमान नगर क्षेत्र का आईटी बेल्ट भी बीजेपी की जीत का मजबूत आधार बना. एमआईटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई और देश-विदेश की आईटी कंपनियों में काम करने का अनुभव रखने वाली ऐश्वर्या पठारे ने युवा और प्रोफेशनल वर्ग से सीधा संवाद कायम किया. लंबे वर्किंग आवर्स, तेज़ शहरीकरण और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों को उन्होंने खुलकर उठाया, जिससे आईटी वोटर बड़ी संख्या में उनके पक्ष में आए.
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, सुरेंद्र पठारे की जमीनी पकड़, मजबूत संगठन और माइक्रो-मैनेजमेंट ने इस रणनीति को पूरी ताकत के साथ जमीन पर उतारा. पारंपरिक मतदाता आधार और आधुनिक शहरी वोटर दोनों को साधने की यह क्षमता बीजेपी की इस सुनामी जीत की बड़ी वजह बनी.
कुल मिलाकर, वार्ड नंबर 3 का यह फैसला सिर्फ एक सीट की जीत नहीं, बल्कि पीएमसी चुनाव में बीजेपी के बढ़ते दबदबे का स्पष्ट संकेत है. ऐश्वर्या पठारे की रिकॉर्डतोड़ जीत को अब पुणे की स्थानीय राजनीति में एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है.