अमित पांडे
चंडीगढ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 फरवरी को पंजाब के जालंधर स्थित डेरा सचखंड बल्लां पहुंच रहे हैं. इस दौरान वे संत निरंजन दास जी से आशीर्वाद लेंगे और सतगुरु रविदास जी महाराज की जयंती के अवसर पर माथा टेकेंगे. यह पहला मौका होगा जब प्रधानमंत्री रविदास जयंती पर काशी के बाहर किसी धार्मिक स्थल पर नमन करेंगे. ऐसे में यह दौरा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक नजरिए से भी बेहद अहम माना जा रहा है.
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क्यों खास है पीएम मोदी का यह दौरा?
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प्रधानमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब पंजाब विधानसभा चुनावों में लगभग एक साल का समय बचा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा भाजपा की पंजाब रणनीति का अहम हिस्सा हो सकती है. बंगाल के बाद पंजाब भाजपा के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण राज्यों में गिना जाता है, जहां पार्टी का न तो मजबूत संगठनात्मक आधार है और न ही प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता अभी तक निर्णायक वोट बैंक में तब्दील हो पाई है.
दोआबा बेल्ट पर फोकस क्यों?
राजनीतिक तौर पर इस दौरे का केंद्र दोआबा बेल्ट है. पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से 23 सीटें इसी क्षेत्र में आती हैं. खास बात यह है कि राज्य के लगभग 32% दलित मतदाता हैं, जिनमें से बड़ी संख्या दोआबा क्षेत्र में रहती है.
2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की राज्यव्यापी लहर के बावजूद दोआबा में उसे एकतरफा सफलता नहीं मिली. यहां की 23 सीटों में से AAP केवल 10 सीटें जीत सकी, जबकि कांग्रेस ने 9 सीटों पर कब्जा जमाया. यही आंकड़े भाजपा को संकेत देते हैं कि दोआबा वह क्षेत्र है, जहां नए सिरे से राजनीतिक समीकरण साधे जा सकते हैं.
डेरा सचखंड बल्लां का सियासी प्रभाव
डेरा सचखंड बल्लां रविदासिया समाज का जालंधर स्थित सबसे बड़ा धार्मिक केंद्र है. इससे करीब 20 लाख संगत जुड़ी हुई है, जो न सिर्फ पंजाब बल्कि देश-विदेश तक फैली हुई है. हालांकि डेरा सीधे तौर पर राजनीति में दखल नहीं देता और न ही किसी पार्टी के पक्ष में वोट करने की अपील करता है, लेकिन बड़े नेताओं की मौजूदगी से संगत तक एक मजबूत संदेश जरूर जाता है.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि डेरा से जुड़े समाज का प्रभाव चुनावी नतीजों में दिखता रहा है. जालंधर सीट से पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की जीत के पीछे भी इसी समाज के वोटों की अहम भूमिका मानी जाती है.
दलित राजनीति और भाजपा की रणनीति
भाजपा इस समय पंजाब में शहरी वर्ग से बाहर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए संघर्ष कर रही है. अकाली दल से अलगाव के बाद पार्टी का ग्रामीण और दलित आधार कमजोर माना जाता है. ऐसे में दलित वोट बैंक भाजपा के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोल सकता है.
हाल के दिनों में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग द्वारा पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री स्व. बूटा सिंह को लेकर दिए गए बयानों से दलित समाज में नाराजगी की चर्चा है. राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि भाजपा इसी असंतोष को अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश कर रही है.
पीएम मोदी के दौरे का संभावित फायदा
भाजपा को इस दौरे से दो बड़े फायदे नजर आ रहे हैं:
- संदेश की राजनीति: प्रधानमंत्री का डेरा सचखंड बल्लां पहुंचना सीधे तौर पर पंजाब के दलित समाज को यह संदेश देता है कि देश का सर्वोच्च नेतृत्व उनके धार्मिक और सामाजिक संस्थानों को सम्मान देता है.
- दोआबा में पकड़ मजबूत करना: भाजपा की नजर दोआबा की 23 सीटों पर है, जहां दलित मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं. पार्टी यहां से पूरे प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करना चाहती है.
पीएम का कार्यक्रम क्या रहेगा?
केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी 1 फरवरी को दोपहर बाद करीब 4 बजे पंजाब पहुंचेंगे. वे सबसे पहले आदमपुर एयरपोर्ट पर उतरेंगे और वहां से सीधे डेरा सचखंड बल्लां जाएंगे.
डेरा परिसर में 649वीं गुरु रविदास जयंती का आयोजन होगा, जिसमें प्रधानमंत्री हिस्सा लेंगे और संत निरंजन दास जी से आशीर्वाद प्राप्त करेंगे.
अहम घोषणाओं की संभावना
भाजपा सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री इस दौरे के दौरान कुछ अहम घोषणाएं कर सकते हैं. इनमें प्रमुख रूप से:
आदमपुर एयरपोर्ट का नाम बदलकर श्री गुरु रविदास जी महाराज के नाम पर रखने की घोषणा.
2027 में आने वाली 650वीं गुरु रविदास जयंती के लिए सालभर चलने वाले राष्ट्रव्यापी कार्यक्रमों की शुरुआत.
अगर ये घोषणाएं होती हैं, तो इसका सीधा राजनीतिक लाभ दलित समाज में भाजपा की स्वीकार्यता बढ़ाने के रूप में देखा जा सकता है.
दोआबा की प्रमुख सीटें जहां दलित वोट निर्णायक
जालंधर (9 सीटें): जालंधर वेस्ट (आरक्षित), करतारपुर (डेरा बल्लां के पास), नकोदर-जालंधर कैंट
होशियारपुर (7 सीटें): चब्बेवाल (एससी), होशियारपुर शहर, गढ़शंकर, दसूहा, मुकेरियां
कपूरथला (4 सीटें): फगवाड़ा (आरक्षित), भुलत्थ, कपूरथला
नवांशहर (3 सीटें): बंगा (आरक्षित), नवांशहर
12 साल में पीएम मोदी के प्रमुख पंजाब दौरे
1 फरवरी 2026 (प्रस्तावित): डेरा सचखंड बल्लां, जालंधर
9 सितंबर 2025: गुरदासपुर, बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा, 1600 करोड़ की सहायता
13 मई 2025: आदमपुर एयरबेस पर सैनिकों से मुलाकात
2024 लोकसभा चुनाव: पटियाला, जालंधर, गुरदासपुर में रैलियां
2022: मोहाली में होमी भाभा कैंसर अस्पताल का उद्घाटन
2019: करतारपुर कॉरिडोर उद्घाटन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डेरा सचखंड बल्लां दौरा धार्मिक आस्था और राजनीतिक रणनीति का संगम माना जा रहा है. जहां एक ओर यह रविदासिया समाज के प्रति सम्मान का संदेश देता है, वहीं दूसरी ओर भाजपा के लिए पंजाब में नई राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश भी दिखाई देती है. आने वाले समय में यह दौरा भाजपा की पंजाब राजनीति को किस दिशा में ले जाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी.