आज के समय में नसों से जुड़ा पुराना दर्द (न्यूरोपैथिक पेन) एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है, जिससे देश-दुनिया में लाखों लोग प्रभावित हैं. पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इसका स्थायी समाधान सीमित है, ऐसे में आयुर्वेद आधारित उपचार लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है. इसी दिशा में पतंजलि आयुर्वेद द्वारा विकसित पीड़ानिल गोल्ड को लेकर एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक शोध सामने आया है.
पीड़ानिल गोल्ड पर किया गया शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पीयर-रिव्यू जर्नल Pain Research and Management (Wiley Publication) में प्रकाशित हुआ है. यह शोध आयुर्वेदिक दवाओं की वैज्ञानिक प्रभावशीलता को प्रमाणित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.
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पतंजलि आयुर्वेद के सह-संस्थापक आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि यह शोध उन मरीजों के लिए नई उम्मीद है, जो लंबे समय से नसों के दर्द से पीड़ित हैं और महंगी एलोपैथिक दवाइयों के बावजूद राहत नहीं पा सके हैं. उन्होंने बताया कि नसों का दर्द मरीजों की दिनचर्या, नींद और कार्यक्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित करता है.
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विशेषज्ञों के अनुसार, न्यूरोपैथिक दर्द आमतौर पर मधुमेह, नसों की चोट, सर्जरी के बाद की जटिलताओं, कीमोथेरेपी के दुष्प्रभाव या रीढ़ की हड्डी की चोट के कारण होता है. इससे मरीजों में चिड़चिड़ापन, नींद न आना और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं.
इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पतंजलि ने एक विशेष हर्बो-मिनरल आयुर्वेदिक दवा पीड़ानिल गोल्ड विकसित की है. यह दवा आयुर्वेदिक सिद्धांतों और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान का संतुलित संयोजन है. इसमें बृहत्वात चिंतामणि रस, पुनर्नवादि मंडूर, शुद्ध गुग्गुलु, मुक्त शुक्ति भस्म, महावात विध्वंसक रस और आमवातारि रस जैसे प्रभावशाली घटक शामिल हैं.
पंतजलि रिसर्च फाउंडेशन के उपाध्यक्ष और ड्रग डिस्कवरी एवं क्लिनिकल रिसर्च विभाग के प्रमुख डॉ. अनुराग वार्ष्णेय ने बताया कि पीड़ानिल गोल्ड जोड़ों के दर्द, सूजन और ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी समस्याओं में भी प्रभावी पाया गया है.
शोध के दौरान चूहों पर किए गए क्रॉनिक कंस्ट्रिक्शन इंजरी (CCI) मॉडल में यह देखा गया कि पीड़ानिल गोल्ड ने ठंड और गर्मी से होने वाले दर्द को काफी हद तक कम किया. अध्ययन में इसकी प्रभावशीलता नसों के दर्द की आम दवा गैबापेंटिन के समान पाई गई. यह दवा दर्द से जुड़े रिसेप्टर्स TRPV1, TRPV4, TRPA1 और TRPM8 की गतिविधि को कम करने के साथ-साथ सूजन बढ़ाने वाले तत्व p38 MAP kinase और IL-6R को भी घटाती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि जहां पारंपरिक दवाइयां केवल लक्षणों से अस्थायी राहत देती हैं, वहीं पीड़ानिल गोल्ड नसों के दर्द के मूल कारणों पर असर डालने का दावा करती है. इस शोध के आधार पर पतंजलि ने आयुर्वेद के माध्यम से नसों के दर्द के लिए एक सुरक्षित, वैज्ञानिक और दीर्घकालिक समाधान प्रस्तुत किया है.
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