नागपुर में आज आयोजित एडवांटेज विदर्भ 2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए अडाणी समूह के जीत अडाणी ने विदर्भ को भारत की भविष्य की विकास यात्रा का अहम केंद्र बताया. उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, आधुनिक बुनियादी ढांचे और समावेशी विकास के जरिए विदर्भ को उद्योग, लॉजिस्टिक्स और स्वच्छ ऊर्जा का प्रमुख हब बनाया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय विकास के साथ-साथ राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.
एडवांटेज विदर्भ 2026 में जीत अडाणी का संबोधन
माननीय मंत्रियों, सम्मानित नेताओं, आदरणीय साझेदारों और प्रिय साथियों,
एडवांटेज विदर्भ 2026 जैसे मंच पर आप सभी के बीच उपस्थित होना मेरे लिए गर्व की बात है. यह मंच केवल विदर्भ या महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के भविष्य को आकार देने वाले दूरदर्शी विचारों को एक साथ लाता है.
भविष्य की बात करने से पहले, यह याद रखना जरूरी है कि विदर्भ हमेशा से क्या रहा है. “विदर्भ” नाम संस्कृत से आया है, जिसका अर्थ है शुद्धता, मजबूती और विशिष्टता जहां “वि” का अर्थ है अनोखा और “दर्भ” उस पवित्र घास को दर्शाता है जो अपनी मजबूती के लिए जानी जाती है. हमारे प्राचीन ग्रंथों में विदर्भ को कला, संस्कृति, ज्ञान और साहस की भूमि बताया गया है. यह रुक्मिणी की धरती है, प्राचीन विदर्भ राजाओं का क्षेत्र है और सभ्यता, ज्ञान और संस्कृति का संगम रहा है.
तुकाराम महाराज के विचारों से लेकर आधुनिक महाराष्ट्र को दिशा देने वाले सुधार आंदोलनों तक, विदर्भ ने भारत की नैतिक और बौद्धिक नींव को मजबूत किया है. प्रशासनिक दृष्टि से भी इसका महत्व रहा है. नागपुर, जो कभी सेंट्रल प्रोविंसेज और बरार की राजधानी था और आज महाराष्ट्र की शीतकालीन राजधानी है, अब उद्योग, नवाचार और कनेक्टिविटी का उभरता केंद्र बन चुका है. भारत के भौगोलिक केंद्र में स्थित नागपुर, अपनी शहरी योजना, शिक्षा संस्थानों और वैज्ञानिक सोच के लिए जाना जाता है और अपनी पहचान बनाए रखते हुए आधुनिक विकास की ओर बढ़ रहा है.
मेरा दृढ़ विश्वास है कि विदर्भ अपने नाम के अर्थ के अनुरूप अपनी समृद्ध विरासत को नई आर्थिक और सांस्कृतिक शक्ति में बदलने के लिए तैयार है. सही बुनियादी ढांचे, नेतृत्व और साझेदारी के साथ यह क्षेत्र शिक्षा, व्यापार और राष्ट्रीय विकास का प्रमुख केंद्र बन सकता है.
आज जो गति हम देख रहे हैं, वह संयोग नहीं है. यह उन नेताओं की दूरदर्शिता और प्रतिबद्धता का परिणाम है जिन्होंने विदर्भ की क्षमता को पहचान कर उस पर निवेश किया.
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने समावेशी विकास को बढ़ावा दिया है, जिससे विदर्भ जैसे प्रतिभा और संसाधनों से भरपूर क्षेत्र भारत की विकास यात्रा में आगे बढ़ सकें. श्री नितिन गडकरी, जो स्वयं विदर्भ के हैं, ने देशभर में कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है. उनके लिए बुनियादी ढांचा केवल निर्माण नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण है. श्री देवेंद्र फडणवीस ने संतुलित क्षेत्रीय विकास के लिए लगातार प्रयास किए हैं, जिससे विदर्भ को प्राथमिकता मिली है.
इन सभी के नेतृत्व में विदर्भ अब केवल संभावनाओं का क्षेत्र नहीं, बल्कि प्रगति का प्रतीक बन चुका है.
विदर्भ में हमारी मौजूदगी केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि पीढ़ियों तक की प्रतिबद्धता है. हम यहां ऊर्जा सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण रोजगार, समुदायों के उत्थान और भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए आए हैं. हमारे निवेश तीन राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर आधारित हैं स्वच्छ और भरोसेमंद ऊर्जा, मजबूत औद्योगिक व लॉजिस्टिक्स ढांचा, और समावेशी विकास.
विदर्भ आज भारत की ऊर्जा कहानी का केंद्र है. तिरोड़ा में हम महाराष्ट्र का सबसे बड़ा और आधुनिक 3,300 मेगावाट का पावर प्लांट चला रहे हैं. 2025 में हमने 600 मेगावाट के बुटीबोरी पावर प्लांट को फिर से शुरू किया. 25 वर्षों के समझौते के तहत हम महाराष्ट्र को 6,600 मेगावाट विश्वसनीय बिजली उपलब्ध करा रहे हैं.
लिंगा, कलमेश्वर में ₹70,000 करोड़ की कोल गैसीफिकेशन परियोजना हमारे सबसे बड़े प्रयासों में से एक है, जिससे 30,000 रोजगार पैदा होंगे और नागपुर को स्वच्छ ऊर्जा तकनीक के वैश्विक मानचित्र पर पहचान मिलेगी.
गोंडखैरी की हमारी अंडरग्राउंड खदान जिम्मेदार खनन का उदाहरण है कम भूमि उपयोग, कोई विस्थापन नहीं, पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास.
लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में बोरखेड़ी में हमारा आईसीडी और महाराष्ट्र भर में चेक पोस्ट्स का अधिग्रहण व्यापार को सस्ता, तेज और प्रतिस्पर्धी बना रहा है.
एविएशन और डिफेंस में, मिहान में हमारा एमआरओ सेंटर नागपुर को विमान रखरखाव का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बना रहा है.
इसके साथ ही, अडाणी फाउंडेशन स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, पोषण, स्वच्छ पानी, सौर ऊर्जा और खेल जैसे क्षेत्रों में लगातार काम कर रही है.
हमारे लिए सतत विकास सबसे अहम है शून्य जल अपशिष्ट, फ्लाई ऐश का पुनः उपयोग और 2030 तक 10 करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य.
मुझे विश्वास है कि आने वाले वर्षों में विदर्भ न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे भारत की विकास कहानी को दिशा देगा. अडाणी समूह एक दीर्घकालिक साझेदार के रूप में विदर्भ के साथ खड़ा है.
आइए, मिलकर अवसर, मजबूती और समृद्धि का नया युग बनाएं.
यही हमारा संकल्प है. यही हमारा उद्देश्य है.
धन्यवाद. जय हिंद.
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